दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य / चण्डी पाठ) मार्कण्डेय पुराण का अंश है, जिसमें 700 श्लोक व 13 अध्याय हैं। इसमें माँ दुर्गा के तीन महान चरित्रों — महाकाली, महालक्ष्मी व महासरस्वती — की विजय-गाथा है। शक्ति-उपासना में इसे सर्वोच्च ग्रंथ माना गया है; नवरात्रि में इसका पाठ मनोकामना-पूर्ति, बाधा-नाश व रक्षा के लिए अत्यंत फलदायी है।
यदि समय कम है या आप आरंभिक साधक हैं, तो यह सरल विधि अपनाएँ:
पूर्ण अनुष्ठान में सप्तशती पाठ से पहले व बाद कुछ 'अंग' पढ़े जाते हैं। शुद्ध क्रम इस प्रकार है:
| क्रम | अंग | उद्देश्य |
|---|---|---|
| 1 | आचमन · संकल्प · न्यास | शुद्धि व दृढ़ संकल्प |
| 2 | देवी कवच | सुरक्षा-कवच |
| 3 | अर्गला स्तोत्र | मनोकामना का द्वार खोलना |
| 4 | कीलक स्तोत्र | पाठ की 'कील' खोलना (सिद्धि) |
| 5 | रात्रि सूक्त | देवी आवाहन |
| 6 | नवार्ण मंत्र जप | मूल मंत्र-शक्ति |
| 7 | 13 अध्याय (3 चरित्र) | मुख्य पाठ |
| 8 | देवी सूक्त · रहस्य-त्रय | पूर्णता |
| 9 | क्षमा प्रार्थना · आरती | त्रुटि-क्षमा व समापन |
ध्यान दें: कीलक स्तोत्र सप्तशती की 'कील' (lock) खोलता है — इसीलिए सिद्ध कुंजिका स्तोत्र को 'कुंजी' कहा गया है, क्योंकि इसके प्रभाव से सप्तशती के सभी कीलक स्वतः खुल जाते हैं।
| चरित्र | अध्याय | देवता | कथा |
|---|---|---|---|
| प्रथम चरित्र | 1 | महाकाली | मधु-कैटभ वध |
| मध्यम चरित्र | 2–4 | महालक्ष्मी | महिषासुर वध |
| उत्तम चरित्र | 5–13 | महासरस्वती | शुम्भ-निशुम्भ वध |
पाठ बीच में रोकना हो तो चरित्र पूरा करके ही रुकें — अध्याय के बीच में न रोकें।
नियमित सप्तशती पाठ से भय व शत्रु-बाधा का नाश, रोग-शोक से रक्षा, धन-समृद्धि, विवाह-संतान सुख, नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा तथा आत्मबल व एकाग्रता में वृद्धि होती है। नवरात्रि में किया गया पाठ मनोकामना-पूर्ति के लिए विशेष फलदायी माना गया है।
पूर्ण पाठ-विधि, न्यास, संकल्प व सिद्धि का रहस्य — गुरु अमिताचार्य जी के मार्गदर्शन में। इस गुप्त नवरात्रि निःशुल्क साधना चैलेंज से आरंभ करें 🙏
🪔 Gupt Navratri Sadhana →नवार्ण मंत्र — ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥
कवच सुरक्षा देता है, अर्गला मनोकामना का द्वार खोलता है, और कीलक पाठ की 'कील' खोलकर सिद्धि प्रदान करता है।
सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ करें — यह सप्तशती के समस्त फल की 'कुंजी' है।
सामान्य पाठ कोई भी कर सकता है। पूर्ण तांत्रिक अनुष्ठान/प्रयोग के लिए गुरु-मार्गदर्शन उचित है।