
पितृ दोष — लक्षण, कारण व निवारण के प्रामाणिक उपाय
जब कुल के पूर्वज अतृप्त रहते हैं, तो उसका प्रभाव वंश पर पितृ-दोष के रूप में आता है — बार-बार अटकाव, संतान-बाधा, धन-हानि व पारिवारिक अशांति इसके सामान्य संकेत हैं।
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पितृ दोष के लक्षण
- संतान-प्राप्ति में बार-बार बाधा।
- मेहनत के बाद भी काम अंतिम क्षण में अटक जाना।
- घर में अशांति, कलह व स्वास्थ्य-कष्ट।
- वंश-वृद्धि व तरक्की में निरंतर रुकावट।
कारण
- पूर्वजों का अंतिम-संस्कार/श्राद्ध अधूरा रहना।
- कुंडली में सूर्य-राहु/शनि का पीड़ित योग।
- पितरों की अतृप्ति व उपेक्षा।
निवारण उपाय
1. पितृ-तर्पण व श्राद्ध
पितृपक्ष व अमावस्या को श्रद्धा से तर्पण, पिंडदान व ब्राह्मण/गरीब को भोजन कराएँ।
2. पीपल-सेवा
शनिवार/अमावस्या को पीपल-वृक्ष पर जल व दीप अर्पित करें — पितृ-शांति का सरल उपाय।
3. दान
अन्न, वस्त्र व तिल का दान पितरों को तृप्त करता है।
4. पितृ-दोष निवारण पूजा
त्रिपिंडी श्राद्ध व नारायण-बलि जैसे शास्त्रोक्त अनुष्ठान गुरु-मार्गदर्शन में कराएँ।
गहरे दोष के लिए
पितृ-दोष का बल व सही निवारण-विधि कुंडली अनुसार भिन्न होती है — व्यक्तिगत विश्लेषण से सटीक उपाय जानना उचित है।
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