शाबर मंत्र साधना — गुरु गोरखनाथ की परंपरा, पूरा मंत्र, विधि व सावधानियाँ
मंत्र संग्रह · शाबर मंत्र

शाबर मंत्र — क्या है, लाभ, पूरा मंत्र, सिद्धि विधि, प्रयोग व सावधानियाँ

✍️ अमिताचार्य, महाकाली तंत्र पीठ के सर्वोच्च गुरु · प्रकाशित 2026-07-14 · ⏱ 6 मिनट पढ़ें  

शाबर मंत्र भारत की सबसे प्राचीन, सरल और रहस्यमयी मंत्र-परंपराओं में से एक हैं। ये संस्कृत के जटिल विधानों से नहीं, बल्कि नाथ सम्प्रदाय की लोकभाषा में रचे गए — ताकि साधना केवल विद्वानों तक सीमित न रहकर हर सामान्य साधक तक पहुँचे। इस लेख में हम शाबर मंत्रों का प्रामाणिक परिचय, उनके पीछे का सिद्धांत, पूरा मंत्र, सिद्धि व प्रयोग विधि, और आवश्यक सावधानियाँ — बिना किसी झूठे दावे के — सरल भाषा में समझेंगे।

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📑 इस लेख में
  1. शाबर मंत्र क्या हैं? — उत्पत्ति व परंपरा
  2. शाबर मंत्र इतने प्रभावशाली क्यों?
  3. शाबर मंत्र के लाभ
  4. पूरा मंत्र (गुरु गोरखनाथ सिद्ध मंत्र)
  5. सिद्धि विधि व नियम
  6. प्रयोग विधि
  7. सावधानियाँ
  8. प्रश्न-उत्तर (FAQ)

शाबर मंत्र क्या हैं? — उत्पत्ति व परंपरा

शाबर मंत्रों का उद्गम नाथ सम्प्रदाय से माना जाता है — भारत की सबसे प्राचीन योग-साधना परम्पराओं में से एक, जिसके आदिगुरु स्वयं भगवान शिव (आदिनाथ) कहे जाते हैं। परम्परा के अनुसार गुरु मत्स्येन्द्रनाथ और उनके शिष्य गुरु गोरखनाथ ने इन मंत्रों को जन-जन तक पहुँचाया।

इनकी सबसे बड़ी विशेषता है इनकी भाषा — ये संस्कृत में नहीं, बल्कि ब्रज, राजस्थानी, अवधी, भोजपुरी जैसी लोकभाषाओं में हैं। गुरु गोरखनाथ ने इन्हें जानबूझकर सरल बोलचाल की भाषा में रचा, ताकि किसान, व्यापारी, स्त्री और साधारण जन — सभी साधना कर सकें, न कि केवल शास्त्र-ज्ञाता। यही कारण है कि ये लोक-परंपरा (आदिवासी, बंजारा आदि) में भी गहराई से रचे-बसे हैं।

शाबर मंत्र इतने प्रभावशाली क्यों माने जाते हैं?

वैदिक मंत्रों की शक्ति उनके संस्कृत स्वर-कम्पन (ध्वनि-विज्ञान) पर आधारित मानी जाती है। शाबर मंत्र इससे भिन्न सिद्धांत पर कार्य करते हैं — परम्परा के अनुसार इनमें उस सिद्ध महापुरुष का तपोबल व संकल्प-शक्ति समाहित है जिसने इन्हें रचा, और वह शक्ति शब्दों के माध्यम से आगे संचरित होती है।

दूसरी विशेषता — इनके लिए तर्पण, न्यास, विस्तृत अनुष्ठान या हवन जैसी जटिल क्रियाओं की अनिवार्यता नहीं होती। इसीलिए परम्परा में इन्हें “शीघ्र फलदायी, विश्वसनीय एवं पूर्ण” कहा गया है। कहा जाता है कि शाबर मंत्र प्रायः जन्म से ही सिद्ध होते हैं — साधना उन्हें “पकाने/जाग्रत” का कार्य करती है, शून्य से सिद्ध करने का नहीं।

🔎 ईमानदार बात: किसी भी मंत्र से चमत्कारिक गारंटी का दावा शास्त्र-सम्मत नहीं। सच्चा फल श्रद्धा, नियम और सतत अभ्यास से आता है।

शाबर मंत्र के लाभ

परम्परा में शाबर मंत्र साधना के ये लाभ बताए गए हैं (श्रद्धा व नियम-सापेक्ष):

ध्यान रहे — ये आध्यात्मिक-मानसिक संबल के मार्ग हैं; चिकित्सा, विधिक या व्यावहारिक आवश्यकताओं का विकल्प नहीं।

पूरा मंत्र — प्रामाणिक शाबर मंत्र

नीचे तीन प्रामाणिक, सुरक्षित (रक्षा-हेतु) मंत्र दिए हैं — कोई भी श्रद्धालु इन्हें शुभ, निष्काम भाव से जप सकता है। (हानि/उग्र प्रयोग के मंत्र यहाँ जानबूझकर सम्मिलित नहीं किए गए।)

1) गुरु गोरखनाथ सिद्ध मंत्र — आध्यात्मिक उन्नति, रक्षा व एकाग्रता:

ॐ ह्रीं श्रीं गों गोरक्षनाथाय विद्महे।
सूर्यपुत्राय धीमहि।
तन्नो गोरक्षः निरञ्जनः प्रचोदयात्॥
ॐ ह्रीं श्रीं गों हुं फट् स्वाहा॥

जप: प्रतिदिन 108 बार · ब्रह्ममुहूर्त · उत्तर मुख। स्वयं-सिद्ध — बिना विशेष दीक्षा जपा जा सकता है।

2) माँ काली रक्षा शाबर मंत्र — शत्रु, भय, भूत-प्रेत व मार्ग की बाधाओं से रक्षा। यह पारंपरिक लोकभाषा शाबर मंत्र है, जो "दोहाई" रूप में समाप्त होता है:

काली काली बोल, मन काली, माय लेत नाम काली।
शत्रु मोर काला होत — बाघ, साँप, भूत-प्रेत अरु दुष्ट दानव को बाधा न।
डर पंथ में नाहिं दिखाय — आज्ञा कामरू कामाख्या, हाड़ी दासी, चंडी की दोहाई॥

प्रयोग: घर से निकलते समय श्रद्धापूर्वक 3 बार उच्चारण — रक्षा-हेतु। (लोकभाषा शाबर मंत्रों के पाठ क्षेत्रानुसार थोड़े भिन्न मिलते हैं।)

3) काली कंकालिनी नज़र-रक्षा मंत्र — बुरी नज़र व नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा:

ॐ नमः काली, काली कंकालिनी,
दुष्ट-दृष्टि विद्रावणी,
मम (अपना नाम) रक्षा कुरु कुरु स्वाहा॥

जप: प्रतिदिन 11 / 21 / 51 बार · 3 / 7 / 11 दिन · "(नाम)" के स्थान पर अपना नाम लें।

प्रामाणिक टिप्पणी: विशिष्ट लक्ष्यों वाले उग्र शाबर सिद्धि-मंत्र परम्परा में गुरु से दीक्षा द्वारा ही ग्रहण किए जाते हैं — इनकी शक्ति गुरु-परम्परा के संचरण से आती है, केवल शब्दों से नहीं। अधूरे या अप्रामाणिक इंटरनेट-मंत्रों से बचें।

सिद्धि विधि व नियम (विधि-विधान)

शाबर मंत्र साधना एक गुप्त विद्या है; इसे नियम व श्रद्धा से करें:

सिद्धि के संकेत: परम्परा के अनुसार सच्ची व नियमित साधना में प्रायः कुछ ही दिनों में अनुभूति होने लगती है — मन की स्थिरता, विशेष स्वप्न, ध्वनि या ऊर्जा का अनुभव।

प्रयोग विधि (सिद्ध मंत्र का उपयोग)

जब मंत्र सिद्ध/जाग्रत हो जाए, तब आवश्यकता पड़ने पर उसका प्रयोग इस प्रकार किया जाता है:

सावधानियाँ

प्रश्न-उत्तर (FAQ)

क्या शाबर मंत्र के लिए गुरु अनिवार्य है? उपर्युक्त गोरखनाथ सिद्ध मंत्र जैसे सर्व-सुलभ मंत्र श्रद्धा से स्वयं जपे जा सकते हैं। परन्तु विशिष्ट लक्ष्यों वाले शाबर सिद्धि-मंत्र व उग्र प्रयोगों के लिए योग्य गुरु का मार्गदर्शन ही सुरक्षित व फलदायी है — नाथ परम्परा मूलतः गुरु-शिष्य परम्परा ही है।

कितने दिनों में फल मिलता है? यह मंत्र, साधक की श्रद्धा व नियम-पालन पर निर्भर है; कोई निश्चित गारंटी नहीं।

क्या कोई भी कर सकता है? सात्त्विक आचरण व नियम-पालन के साथ कोई भी श्रद्धालु सरल सिद्ध मंत्र जप सकता है।

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