जब कुंडली के सभी ग्रह राहु और केतु के बीच आ जाते हैं तो काल सर्प दोष बनता है, जिससे जीवन में बार-बार असफलता और मानसिक अशांति की शिकायत रहती है।
जब भी जीवन में एक के बाद एक अड़चनें आती रहें और मेहनत का फल देर से मिले, तो मन में यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है — कहीं काल सर्प दोष तो नहीं? शास्त्रों के अनुसार जब जन्मकुंडली के सभी सात ग्रह राहु-केतु की धुरी के एक ओर आ जाते हैं, तब काल सर्प दोष बनता है। यह अशुभ ही नहीं, बल्कि व्यक्ति को गहन आध्यात्मिक व मानसिक शक्ति भी देता है — इतिहास में कई महान व्यक्तित्वों की कुंडली में यह दोष रहा है।
उपाय: सोमवार को शिवलिंग पर कच्चे दूध और जल से अभिषेक करें तथा 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र की एक माला जाप करें। नागपंचमी के दिन चांदी के नाग-नागिन का जोड़ा शिवजी को अर्पित कर बहते जल में प्रवाहित करें। प्रतिदिन राहु-केतु की शांति हेतु 'ॐ रां राहवे नमः' और 'ॐ कें केतवे नमः' का जाप करें, विशेषकर बुधवार-शनिवार को। संभव हो तो त्र्यंबकेश्वर (नासिक) में काल सर्प शांति पूजा करवाना शास्त्रोक्त और प्रभावी माना गया है।
काल सर्प दोष के भी बारह भेद होते हैं (अनंत, कुलिक, वासुकि आदि) और हर भेद का प्रभाव अलग होता है, इसलिए सामान्य उपाय से राहत मिलती है पर सटीक निवारण के लिए कुंडली में दोष का प्रकार जानना आवश्यक है। अपनी कुंडली में यह दोष कितना प्रभावी है, यह जानने हेतु गुरुजी अमिताचार्य से Ultimate Spiritual Analysis के अंतर्गत परामर्श लें।
अपनी समस्या के अनुसार सही साधना पाएँ, या गुरुदेव से गहन व्यक्तिगत विश्लेषण कराएँ।
अपनी समस्या चुनें →विश्लेषण