कुंडली मिलान में मंगल दोष निकलने पर विवाह में बाधा और वैवाहिक जीवन में तनाव की आशंका से लोग चिंतित हो जाते हैं।
मांगलिक दोष का नाम सुनकर विवाह को लेकर घबराना आम बात है, लेकिन यह समझना ज़रूरी है कि यह दोष सुधार योग्य है, स्थायी अभिशाप नहीं। जब कुंडली के प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम या द्वादश भाव में मंगल स्थित होता है, तब मंगल दोष (कुजदोष) बनता है, जिससे विवाह में विलंब या दांपत्य जीवन में उग्रता की आशंका रहती है।
उपाय: मंगलवार का व्रत रखें और हनुमानजी की उपासना करें — हनुमान चालीसा का नित्य पाठ मंगल के उग्र प्रभाव को शांत करता है। प्रतिदिन 'ॐ अं अंगारकाय नमः' मंत्र की एक माला जाप मंगलवार से आरंभ करें। मंगलवार को लाल मसूर दाल, गुड़ और लाल वस्त्र का दान करें, यह मंगल ग्रह को प्रसन्न करता है। यदि दोनों कुंडली में मंगल दोष हो तो शास्त्रों में इसे प्रायः समान माना गया है, इसलिए विवाह से पहले विधिवत शांति पूजा करवाना पारंपरिक उपाय है जो कई परिवारों में प्रचलित है। विवाह से पूर्व नवग्रह शांति या मंगल दोष निवारण पूजा भी करवाई जा सकती है।
ध्यान रहे, मंगल दोष के भी अंश और तीव्रता अलग-अलग कुंडली में भिन्न होती है — कई बार यह विशेष स्थितियों से स्वतः कमज़ोर भी हो जाता है। इसलिए बिना कुंडली देखे घबराने की जगह सही विश्लेषण करवाना बेहतर है। अपनी और जीवनसाथी की कुंडली मिलान व मंगल दोष की सटीक स्थिति जानने हेतु गुरुजी अमिताचार्य से Ultimate Spiritual Analysis में परामर्श करें।
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