अच्छी कमाई के बावजूद बचत न हो पाना, अचानक खर्चे आना और आर्थिक स्थिरता न मिलना — यह समस्या आजकल बहुत लोगों को परेशान करती है।
मेहनत करने पर भी धन का न टिकना, यह स्थिति बहुत हताश करने वाली होती है, और इसके पीछे अक्सर ज्योतिषीय व वास्तु दोनों कारण होते हैं। कुंडली में दूसरे भाव (धन स्थान), ग्यारहवें भाव (लाभ स्थान) या शुक्र-बुध की निर्बलता अक्सर धन रुकावट का कारण बनती है। साथ ही घर में वास्तु दोष, तिजोरी की गलत दिशा, या घर में नकारात्मक ऊर्जा भी धन को टिकने नहीं देती।
उपाय: प्रतिदिन शाम को घर के मुख्य द्वार पर घी का दीपक जलाकर 'ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः' मंत्र की एक माला जाप करें, इससे लक्ष्मी कृपा बढ़ती है। शुक्रवार को माँ लक्ष्मी को कमल का फूल और खीर अर्पित करें, तथा घर के मंदिर में एक श्रीयंत्र स्थापित करें। तिजोरी या पैसे रखने की जगह उत्तर दिशा में रखें और वहां हल्दी में लपेटी कौड़ियां रखें, यह परंपरागत धन-वृद्धि उपाय है। प्रत्येक शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को गरीबों को अन्नदान करें — दान से बंधा धन खुलता है, यह शास्त्रों का प्रमाणित सिद्धांत है। अनावश्यक कर्ज और उधार लेन-देन से बचें।
धन रुकावट के पीछे कई बार कुंडली में शनि-राहु का संयोग या पितृ ऋण जैसे गहरे कारण भी होते हैं, जिनका पता सामान्य उपाय से नहीं चलता। अपनी कुंडली में धन बाधा का सटीक कारण जानने और स्थायी समाधान हेतु गुरुजी अमिताचार्य से Ultimate Spiritual Analysis में परामर्श लें।
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