घर में बार-बार बीमारी, संतान संबंधी समस्या या अकारण आर्थिक तंगी होने पर लोग पितृ दोष की आशंका जताते हैं और शांति के उपाय खोजते हैं।
पूर्वजों की अतृप्त आत्मा या उनके प्रति किए गए कर्तव्यों में कमी से जब कुंडली में पितृ दोष बनता है, तो परिवार में अस्थिरता महसूस होना बहुत स्वाभाविक है — यह चिंता वाजिब है। पितृ दोष के सामान्य लक्षण हैं: संतान प्राप्ति में देरी, घर में बार-बार कलह, अकारण स्वास्थ्य समस्याएं, तरक्की में रुकावट और सपनों में पूर्वजों का बार-बार आना। कुंडली में सूर्य-राहु या गुरु पर पाप ग्रहों की दृष्टि इस दोष का संकेत देती है।
निवारण के उपाय: प्रतिदिन प्रातः सूर्य को जल अर्पित करते समय 'ॐ पितृभ्यः नमः' कहें और पितरों का स्मरण करें। पितृपक्ष (श्राद्ध पक्ष) में अपनी तिथि पर ब्राह्मण भोजन या जरूरतमंदों को अन्नदान अवश्य करें — यह सबसे प्रभावी उपाय माना गया है। अमावस्या के दिन पीपल के वृक्ष में जल व काले तिल मिलाकर अर्पित करें और सरसों तेल का दीपक जलाएं। घर के बड़ों का आशीर्वाद व सम्मान बनाए रखें, यह भी पितृ ऋण चुकाने का एक भाव है। श्रद्धापूर्वक पितृ स्तोत्र का पाठ भी लाभकारी है।
पितृ दोष की गहराई और उससे जुड़े व्यक्तिगत कारण हर कुंडली में अलग होते हैं, इसलिए सामान्य उपाय के साथ सटीक निदान भी आवश्यक है। अपनी कुंडली में पितृ दोष की स्थिति जानने और उचित शांति विधि हेतु गुरुजी अमिताचार्य द्वारा Ultimate Spiritual Analysis में परामर्श लें।
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