कुंडली में राहु-केतु की स्थिति के बारे में सुनकर लोग जानना चाहते हैं कि इनका जीवन पर कैसा असर पड़ता है और शांति के लिए क्या करना चाहिए।
राहु-केतु के बारे में सुनकर उलझन होना स्वाभाविक है, क्योंकि ये छाया ग्रह हैं और इनका फल परिस्थिति अनुसार बहुत भिन्न होता है। राहु भ्रम, महत्वाकांक्षा, अचानक उतार-चढ़ाव और विदेश-तकनीक से जुड़े फल देता है, जबकि केतु वैराग्य, आध्यात्मिकता, रहस्यमयी हानि व अचानक त्याग का कारक है। ये दोनों जिस भाव व राशि में बैठते हैं, वहां के विषयों पर अस्थिरता व अप्रत्याशित परिणाम देते हैं।
उपाय: बुधवार-शनिवार को 'ॐ रां राहवे नमः' मंत्र की एक माला जाप करें, राहु की शांति के लिए यह अत्यंत प्रभावी माना गया है। केतु शांति हेतु 'ॐ कें केतवे नमः' मंत्र का जाप करें और गणेशजी की पूजा नियमित करें, क्योंकि गणपति केतु के लिए विशेष शुभकारी माने गए हैं। शनिवार को काले तिल, नारियल व मूली का दान करें और गरीबों को भोजन कराएं। शिवजी की उपासना, विशेषकर सोमवार का व्रत, राहु-केतु दोनों की अशुभता को शांत करने का शास्त्रोक्त उपाय है — 'ॐ नमः शिवाय' का नित्य जाप करें। नागपंचमी पर नाग देवता की पूजा भी विशेष लाभकारी मानी गई है, विशेषकर यदि राहु-केतु कालसर्प योग बना रहे हों।
राहु-केतु का सटीक प्रभाव भाव, राशि, दृष्टि और महादशा के अनुसार हर कुंडली में अलग होता है, इसलिए सामान्य उपाय के साथ व्यक्तिगत विश्लेषण भी आवश्यक है। अपनी कुंडली में राहु-केतु की सटीक स्थिति व प्रभाव जानने के लिए गुरुजी अमिताचार्य से Ultimate Spiritual Analysis में परामर्श लें।
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