विवाह के काफी समय बाद भी संतान सुख न मिलना दंपति के लिए मानसिक और पारिवारिक रूप से बहुत कष्टकारी होता है।
संतान सुख की प्रतीक्षा में बीतता समय बहुत पीड़ादायक होता है, यह कष्ट पूरी तरह समझ आता है। ज्योतिष में संतान का कारक पंचम भाव और गुरु (बृहस्पति) ग्रह होता है; इस भाव पर शनि-राहु की दृष्टि, पंचमेश की निर्बलता या गुरु का पीड़ित होना संतान बाधा का सामान्य कारण माना गया है। कई बार यह कुछ विशेष दशा या समय-अवधि तक सीमित रुकावट भी होती है।
उपाय: दोनों पति-पत्नी प्रतिदिन प्रातः 'ॐ ह्रीं गोपाल कृष्णाय नमः' अथवा संतान गोपाल मंत्र का 108 बार जाप करें, यह शास्त्रों में विशेष रूप से वर्णित है। गुरुवार को केले के वृक्ष की पूजा करें, जल चढ़ाएं और पीले वस्त्र धारण कर 'ॐ बृं बृहस्पतये नमः' का जाप करें। संतान गोपाल स्तोत्र या दुर्गा सप्तशती का श्रद्धापूर्वक पाठ भी अत्यंत लाभकारी माना गया है। शिव-पार्वती की संयुक्त पूजा और सोमवार का व्रत रखना भी शास्त्रोक्त परंपरा है, विशेषकर सावन मास में। घर में सकारात्मकता बनाए रखें और मानसिक तनाव कम करने हेतु नियमित ध्यान करें, क्योंकि तनाव भी बाधा का एक कारण बनता है।
संतान बाधा के पीछे कुंडली में पितृ दोष, कालसर्प दोष या नाड़ी दोष जैसे कई गहरे कारण भी छुपे हो सकते हैं, जिनका सही निदान व्यक्तिगत कुंडली विश्लेषण से ही संभव है। अपनी और जीवनसाथी की कुंडली दिखाकर गुरुजी अमिताचार्य से Ultimate Spiritual Analysis में सही मार्गदर्शन व उपाय जानें।
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