उम्र, योग्यता और रिश्तों की कोशिश के बावजूद विवाह तय न होना या बार-बार टूट जाना, यह देखकर व्यक्ति और परिवार मानसिक रूप से परेशान हो जाते हैं।
बार-बार रिश्ते आना और टूट जाना, या सही जीवनसाथी न मिलना — यह पीड़ा बहुत गहरी होती है, आपकी चिंता पूरी तरह स्वाभाविक है। ज्योतिष में विवाह में देरी के कई कारण हो सकते हैं: सप्तम भाव या सप्तमेश पर शनि-राहु की दृष्टि, गुरु (बृहस्पति, स्त्री कुंडली में विवाह कारक) की निर्बलता, या शुक्र (पुरुष कुंडली में विवाह कारक) पर पाप प्रभाव।
उपाय: शुक्रवार को माँ लक्ष्मी और शुक्र देव की पूजा करें, सफेद वस्त्र व मिठाई का दान करें। बृहस्पति की कृपा हेतु गुरुवार को पीले वस्त्र पहनकर केले के वृक्ष में जल चढ़ाएं और 'ॐ बृं बृहस्पतये नमः' मंत्र की एक माला जाप करें। शीघ्र विवाह हेतु विशेष विवाह बाधा निवारण मंत्रों का जप शास्त्रों में वर्णित है, पर इन्हें गुरु के मार्गदर्शन में ही करें। प्रतिदिन प्रातः 'ॐ नमः शिवाय' का जाप कर पार्वती-शिव को प्रणाम करें, माना जाता है इनकी पूजा से मनचाहा जीवनसाथी शीघ्र मिलता है। घर में नकारात्मकता व अनावश्यक विवाद से बचें, यह भी विवाह में विलंब का एक कारण बनता है।
विवाह में देरी के पीछे कई बार पितृ दोष, मंगल दोष या ग्रह गोचर जैसी जटिल वजहें छुपी होती हैं जो सामान्य उपाय से पूर्ण रूप से हल नहीं होतीं। सही और सटीक कारण जानने के लिए गुरुजी अमिताचार्य से Ultimate Spiritual Analysis के अंतर्गत अपनी कुंडली दिखाएं और उचित मार्गदर्शन प्राप्त करें।
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