जब आप इस परंपरा को सहयोग देते हैं, तो आप केवल दान नहीं देते — आप उन साधकों की यात्रा का हिस्सा बनते हैं जिन्हें मार्गदर्शन चाहिए, और उस प्राचीन ज्ञान के रक्षक बनते हैं जो हज़ारों वर्षों से जीवित है। शास्त्रों में कहा गया है — धर्म-सेवा का पुण्य सौ गुना लौटता है।
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नियमित पूजा, हवन व धर्म-कार्य — समस्त साधकों के कल्याण हेतु।
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