✋ अष्टम महाविद्या · बगलामुखी
॥ ॐ ह्लीं बगलामुखी देव्यै ह्लीं ॐ नमः ॥
स्तम्भन-शक्ति की देवी अष्टम महाविद्या बगलामुखी (पीताम्बरा) का मंत्र — शत्रु-बाधा, वाद-विवाद/मुकदमे, अन्याय व नकारात्मकता के स्तम्भन तथा धर्म की विजय हेतु।
देवीबगलामुखी (पीताम्बरा)
महाविद्याअष्टम
बीजह्लीं
जप संख्या108 नित्य
मालाहल्दी माला
दिन · वस्त्रमंगल/गुरु · पीत
मूल मंत्र (नित्य जप)
॥ ॐ ह्लीं बगलामुखी देव्यै ह्लीं ॐ नमः ॥
Om Hleem Bagalaamukhee Devyai Hleem Om Namah
Om, Hleem — salutations to Devi Bagalamukhi, the power that stills every adversity — Hleem, Om.
बगलामुखी गायत्री
॥ ॐ बगलामुख्यै विद्महे स्तम्भिन्यै धीमहि।
तन्नो देवी प्रचोदयात्॥
Om Bagalaamukhyai Vidmahe Stambhinyai Dheemahi,
Tanno Devee Prachodayaat.
May we know Bagalamukhi, meditate on the Stiller; may that Goddess inspire us.
📖 शब्दार्थ (Word-by-Word)
| ॐ (Om) | प्रणव |
| ह्लीं (Hleem) | बगलामुखी का बीज (स्तम्भन-शक्ति) |
| बगलामुखी देव्यै | देवी बगलामुखी को |
| नमः | नमन |
🕉️ विस्तृत व्याख्या
बगलामुखी अष्टम महाविद्या हैं — स्तम्भन-शक्ति की देवी, जो नकारात्मकता, अन्याय, संकट व शत्रु-बाधा को "स्तम्भित" (रोक) देती हैं। पीत-वर्णा होने से "पीताम्बरा" कहलाती हैं। विशेषतः वाद-विवाद, मुकदमे व अन्याय के विरुद्ध धर्म की विजय हेतु उपास्य।
बगलामुखी के पूर्ण गूढ़ ज्ञान हेतु देखें: दस महाविद्या — बगलामुखी।
🌿 लाभ
शत्रु-बाधा व नकारात्मकता का स्तम्भन
वाद-विवाद/मुकदमे में धर्म की विजय
आत्म-रक्षा, स्थिरता व निर्भयता
वाणी-बल व आत्म-विश्वास
अन्याय व छल से रक्षा
🪔 सम्पूर्ण साधना विधि
सामग्री
पीत (हल्दी-रंगा) आसन व वस्त्र, पीत पुष्प (गेंदा), हल्दी, बगलामुखी यंत्र/चित्र, चमेली-तेल का दीप, हल्दी माला।स्नान व शुद्धि
स्नान कर पीत वस्त्र पहनें; पूर्व दिशा की ओर मुख करके पीत आसन पर बैठें।दीप व प्रणाम
बगलामुखी यंत्र/चित्र के सम्मुख दीप जलाएँ, पीत पुष्प व हल्दी अर्पित कर प्रणाम करें।संकल्प
दाहिने हाथ में जल लेकर नाम, गोत्र, स्थान व उद्देश्य (शत्रु-बाधा-स्तम्भन · धर्म-रक्षा) कहकर संकल्प लें।माला जप
हल्दी माला से मंत्र का शुद्ध उच्चारण करते हुए एक माला (108) जप करें। सुमेरु न लाँघें।ध्यान
जप के साथ पीत-प्रकाशमयी माँ बगलामुखी द्वारा समस्त बाधाओं के स्तम्भन का ध्यान करें।समर्पण
जप पूर्ण होने पर समस्त जप माता को समर्पित करें; पीत वस्त्र/हल्दी दान करें।
⏰ श्रेष्ठ समय व नियम
- समय: मध्याह्न अथवा रात्रि।
- विशेष दिन: मंगलवार/गुरुवार।
- वस्त्र-पुष्प: सर्वत्र पीत (हल्दी-रंग) का प्रयोग।
- नियमितता: 40 दिन नियमित जप से विशेष लाभ।
- आचार: सात्विक आहार, सत्य व संयम।
⚠️ सावधानी: बगलामुखी साधना केवल आत्म-रक्षा व धर्म-हेतु है — किसी निर्दोष को हानि पहुँचाने हेतु इसका प्रयोग शास्त्र-विरुद्ध व वर्जित है, और उसका फल साधक पर ही लौटता है। उग्र प्रयोग व अनुष्ठान गुरु-दीक्षा में करें; सामान्य भक्त नित्य 108 जप श्रद्धा से कर सकते हैं।
❓ प्रश्न-उत्तर
बगलामुखी मंत्र किसलिए है?शत्रु-बाधा, अन्याय, मुकदमे व नकारात्मकता के स्तम्भन तथा धर्म की विजय, आत्म-रक्षा व स्थिरता हेतु।
कितनी बार जपें?नित्य 108 बार; विशेष अनुष्ठान गुरु-मार्गदर्शन में।
क्या दीक्षा आवश्यक है?नित्य 108 जप श्रद्धा से किया जा सकता है; उग्र प्रयोग व अनुष्ठान हेतु गुरु-दीक्षा आवश्यक।
सर्वोत्तम समय व दिन?मंगलवार/गुरुवार, मध्याह्न अथवा रात्रि; पीत वस्त्र-पुष्प सहित।