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🦁 दुर्गा · गायत्री

॥ दुर्गा गायत्री मंत्र ॥

देवी कात्यायनी के ध्यान हेतु गायत्री-मंत्र — विशेषतः विवाह-बाधा निवारण व शक्ति-प्राप्ति हेतु प्रसिद्ध।

देवतादेवी कात्यायनी/दुर्गा
प्रकारगायत्री मंत्र
जप संख्या108 नित्य
मालास्फटिक/रुद्राक्ष
श्रेष्ठ समयप्रातः
दिननवरात्रि षष्ठी विशेष
ॐ कात्यायन्यै च विद्महे कन्याकुमार्यै च धीमहि।
तन्नो दुर्गिः प्रचोदयात्॥
Om Kaatyaayanyai cha vidmahe Kanyaakumaaryai cha dheemahi. Tanno Durgih prachodayaat.
"We meditate upon Goddess Katyayani, the eternal maiden; may Durga inspire and guide us."

📖 शब्दार्थ (Word-by-Word)

कात्यायन्यै च विद्महेहम कात्यायनी को जानते हैं
कन्याकुमार्यै च धीमहिकन्या-कुमारी रूप का ध्यान करते हैं
तन्नो दुर्गिः प्रचोदयात्वे दुर्गा हमें प्रेरित करें

🕉️ विस्तृत व्याख्या

यह गायत्री-छंद में देवी कात्यायनी (दुर्गा के षष्ठ स्वरूप) की स्तुति है। पुराणों में कात्यायनी की उपासना योग्य वर व विवाह-बाधा निवारण के लिए प्रसिद्ध है — गोपियों ने भी कृष्ण-प्राप्ति हेतु कात्यायनी व्रत किया था।

यह मंत्र शक्ति, साहस व देवी-कृपा प्रदान करता है और नवरात्रि की षष्ठी तिथि पर विशेष रूप से जपा जाता है।

🌿 लाभ

विवाह-बाधा निवारण
योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति
शक्ति, साहस व आत्मबल
देवी-कृपा

🪔 सम्पूर्ण साधना विधि

सामग्री व तैयारी

घी या कपूर का दीप, शुद्ध जल, पुष्प, दुर्गा/कात्यायनी चित्र, लाल पुष्प, स्वच्छ आसन तथा स्फटिक या रुद्राक्ष माला तैयार रखें।

स्नान व शुद्धि

प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख करके आसन पर बैठें। मन को शांत करें।

दीप व प्रणाम

देवी कात्यायनी के चित्र/यंत्र के सम्मुख दीप जलाएँ, पुष्प व जल अर्पित कर श्रद्धा से प्रणाम करें।

संकल्प

दाहिने हाथ में जल लेकर अपना नाम, गोत्र, स्थान व उद्देश्य (शक्ति व मनोवांछित वर) कहकर संकल्प लें।

माला जप

स्फटिक या रुद्राक्ष माला से मंत्र का शुद्ध, स्पष्ट उच्चारण करते हुए कम-से-कम एक माला (108 बार) जप करें। सुमेरु (मेरु मणि) को न लाँघें — वहाँ से माला पलटकर पुनः जपें।

ध्यान

जप के साथ देवी कात्यायनी के दिव्य स्वरूप व कृपा-प्रकाश का ध्यान करें और भाव रखें कि उनकी कृपा आप पर बरस रही है।

समर्पण

जप पूर्ण होने पर हाथ जोड़कर समस्त जप देवी कात्यायनी को समर्पित करें और प्रसाद ग्रहण करें।

⏰ श्रेष्ठ समय व नियम

❓ प्रश्न-उत्तर

दुर्गा गायत्री का अर्थ क्या है?हम कात्यायनी का ध्यान करते हैं; दुर्गा हमें प्रेरित करें।
दुर्गा गायत्री कितनी बार जपना चाहिए?नित्य 108 बार।
क्या इसे जपने के लिए दीक्षा आवश्यक है?नित्य 108 जप श्रद्धा से कोई भी कर सकता है, दीक्षा अनिवार्य नहीं। विशेष अनुष्ठान, सम्पुट व हवन के लिए गुरु मार्गदर्शन उचित है।
दुर्गा गायत्री जपने का सर्वोत्तम समय कौन-सा है?प्रातः व नवरात्रि षष्ठी श्रेष्ठ।

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