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🦁 दुर्गा · शरणागति

॥ ॐ ह्रीं दुं दुर्गायै नमः ॥

माया-बीज 'ह्रीं' व रक्षक-बीज 'दुं' सहित शरणागति मंत्र — माँ की शरण, संकट-मुक्ति व भय-नाश हेतु।

देवतामाँ दुर्गा
प्रकारशरणागति मंत्र
बीजह्रीं · दुं
जप संख्या108 नित्य
मालारुद्राक्ष/स्फटिक
श्रेष्ठ समयनवरात्रि · शुक्रवार
॥ ॐ ह्रीं दुं दुर्गायै नमः ॥
Om Hreem Dum Durgaayai Namah
"Om, Hreem, Dum — I take refuge in and bow to Goddess Durga."

📖 शब्दार्थ (Word-by-Word)

ह्रीं (Hreem)माया-बीज — देवी की सर्वव्यापी शक्ति
दुं (Dum)दुर्गा का रक्षक बीज
दुर्गायै नमःमाँ दुर्गा को नमन व शरणागति

🕉️ विस्तृत व्याख्या

इस मंत्र में माया-बीज ह्रीं व रक्षक-बीज दुं दोनों जुड़े हैं, जिससे यह शरणागति (पूर्ण समर्पण) व रक्षा का सशक्त मंत्र बनता है। साधक माँ की शरण में जाकर समस्त भय व संकट से मुक्ति की प्रार्थना करता है।

संकट-काल, भय या बाधा में यह मंत्र विशेष रूप से जपा जाता है। श्रद्धा व समर्पण-भाव इसका मूल है।

🌿 लाभ

संकट-मुक्ति व रक्षा
भय व चिंता का नाश
माँ की शरण व कृपा
मानसिक बल

🪔 सम्पूर्ण साधना विधि

सामग्री व तैयारी

घी या कपूर का दीप, शुद्ध जल, पुष्प, दुर्गा चित्र/यंत्र, लाल पुष्प, स्वच्छ आसन तथा रुद्राक्ष या स्फटिक माला तैयार रखें।

स्नान व शुद्धि

प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख करके आसन पर बैठें। मन को शांत करें।

दीप व प्रणाम

माँ दुर्गा के चित्र/यंत्र के सम्मुख दीप जलाएँ, पुष्प व जल अर्पित कर श्रद्धा से प्रणाम करें।

संकल्प

दाहिने हाथ में जल लेकर अपना नाम, गोत्र, स्थान व उद्देश्य (शरण, रक्षा व संकट-मुक्ति) कहकर संकल्प लें।

माला जप

रुद्राक्ष या स्फटिक माला से मंत्र का शुद्ध, स्पष्ट उच्चारण करते हुए कम-से-कम एक माला (108 बार) जप करें। सुमेरु (मेरु मणि) को न लाँघें — वहाँ से माला पलटकर पुनः जपें।

ध्यान

जप के साथ माँ दुर्गा के दिव्य स्वरूप व कृपा-प्रकाश का ध्यान करें और भाव रखें कि उनकी कृपा आप पर बरस रही है।

समर्पण

जप पूर्ण होने पर हाथ जोड़कर समस्त जप माँ दुर्गा को समर्पित करें और प्रसाद ग्रहण करें।

⏰ श्रेष्ठ समय व नियम

❓ प्रश्न-उत्तर

दुर्गा शरणागति मंत्र का अर्थ क्या है?माया-बीज ह्रीं व रक्षक-बीज दुं सहित माँ दुर्गा की शरण व नमन।
दुर्गा शरणागति मंत्र कितनी बार जपना चाहिए?नित्य 108 बार; संकट में अधिक।
क्या इसे जपने के लिए दीक्षा आवश्यक है?नित्य 108 जप श्रद्धा से कोई भी कर सकता है, दीक्षा अनिवार्य नहीं। विशेष अनुष्ठान, सम्पुट व हवन के लिए गुरु मार्गदर्शन उचित है।
दुर्गा शरणागति मंत्र जपने का सर्वोत्तम समय कौन-सा है?नवरात्रि, शुक्रवार व संकट-काल।

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