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💪 हनुमान · बीज मुख्य मंत्र

॥ ॐ हं हनुमते नमः ॥

बल, साहस व भक्ति के प्रतीक हनुमान का बीज 'हं' सहित मंत्र — शक्ति, निर्भयता व रक्षा हेतु।

देवताश्री हनुमान
प्रकारबीज मंत्र
बीजहं
जप संख्या108 नित्य
मालातुलसी/रुद्राक्ष
श्रेष्ठ समयमंगल · शनिवार
॥ ॐ हं हनुमते नमः ॥
Om Ham Hanumate Namah
"Om, Ham — salutations to Lord Hanuman, embodiment of strength and devotion."

📖 शब्दार्थ (Word-by-Word)

ॐ (Om)प्रणव
हं (Ham)हनुमान का बीजाक्षर — प्राण व बल की शक्ति
हनुमते नमःश्री हनुमान को नमन

🕉️ विस्तृत व्याख्या

श्री हनुमान बल, साहस, भक्ति व सेवा के आदर्श हैं। उनका बीजाक्षर हं प्राण-शक्ति व निर्भयता का प्रतीक है। यह मंत्र भय, नकारात्मकता व बुरी शक्तियों से रक्षा तथा आत्मबल-वृद्धि हेतु सर्वाधिक प्रभावी है।

मंगल व शनिवार को इसका जप विशेष फलदायी है, विशेषतः शनि-दोष व भय-निवारण हेतु।

🌿 लाभ

बल, साहस व आत्मबल
भय व नकारात्मकता का नाश
बुरी शक्तियों से रक्षा
शनि-दोष व संकट-निवारण
भक्ति व मनोबल

🪔 सम्पूर्ण साधना विधि

सामग्री व तैयारी

घी या कपूर का दीप, शुद्ध जल, पुष्प, हनुमान चित्र/यंत्र, सिंदूर, चमेली-तेल दीप, बूँदी/गुड़ भोग, स्वच्छ आसन तथा तुलसी या रुद्राक्ष माला तैयार रखें।

स्नान व शुद्धि

प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख करके आसन पर बैठें। मन को शांत करें।

दीप व प्रणाम

श्री हनुमान के चित्र/यंत्र के सम्मुख दीप जलाएँ, पुष्प व जल अर्पित कर श्रद्धा से प्रणाम करें।

संकल्प

दाहिने हाथ में जल लेकर अपना नाम, गोत्र, स्थान व उद्देश्य (बल, रक्षा व भय-नाश) कहकर संकल्प लें।

माला जप

तुलसी या रुद्राक्ष माला से मंत्र का शुद्ध, स्पष्ट उच्चारण करते हुए कम-से-कम एक माला (108 बार) जप करें। सुमेरु (मेरु मणि) को न लाँघें — वहाँ से माला पलटकर पुनः जपें।

ध्यान

जप के साथ श्री हनुमान के दिव्य स्वरूप व कृपा-प्रकाश का ध्यान करें और भाव रखें कि उनकी कृपा आप पर बरस रही है।

समर्पण

जप पूर्ण होने पर हाथ जोड़कर समस्त जप श्री हनुमान को समर्पित करें और प्रसाद ग्रहण करें।

⏰ श्रेष्ठ समय व नियम

❓ प्रश्न-उत्तर

हनुमान मंत्र का अर्थ क्या है?'हं' हनुमान का बीज है — बल व भक्ति के प्रतीक हनुमान को नमन।
हनुमान मंत्र कितनी बार जपना चाहिए?नित्य 108 बार।
क्या इसे जपने के लिए दीक्षा आवश्यक है?नित्य 108 जप श्रद्धा से कोई भी कर सकता है, दीक्षा अनिवार्य नहीं। विशेष अनुष्ठान, सम्पुट व हवन के लिए गुरु मार्गदर्शन उचित है।
हनुमान मंत्र जपने का सर्वोत्तम समय कौन-सा है?मंगलवार व शनिवार श्रेष्ठ।

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