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⚔️ भैरव · काल भैरव

॥ ॐ कालभैरवाय नमः ॥

काशी के कोतवाल काल भैरव का मंत्र — काल व भय के स्वामी, न्याय, ऋण-मुक्ति व रक्षा हेतु।

देवताकाल भैरव
प्रकारमूल मंत्र
जप संख्या108 नित्य
मालारुद्राक्ष
श्रेष्ठ समयरात्रि
दिनरविवार · भैरव अष्टमी
॥ ॐ कालभैरवाय नमः ॥
Om Kaalabhairavaaya Namah
"Om — salutations to Kaal Bhairava, lord of time and the guardian of Kashi."

📖 शब्दार्थ (Word-by-Word)

ॐ (Om)प्रणव
कालसमय व मृत्यु के स्वामी
भैरवाय नमःभैरव को नमन

🕉️ विस्तृत व्याख्या

काल भैरव भगवान शिव के उग्र रक्षक स्वरूप हैं, जिन्हें काशी का 'कोतवाल' कहा जाता है। वे काल (समय) व भय के अधिपति हैं तथा अपने भक्तों को न्याय, रक्षा व ऋण-मुक्ति प्रदान करते हैं।

यह मंत्र भय, शत्रु-बाधा व अकाल-संकट से रक्षा करता है। पूर्ण पाठ हेतु देखें: काल भैरव अष्टकम

🌿 लाभ

भय व संकट का नाश
न्याय व विजय
ऋण व आर्थिक बाधा से मुक्ति
शत्रु-प्रभाव से रक्षा
समय-अनुकूलता

🪔 सम्पूर्ण साधना विधि

सामग्री व तैयारी

घी या कपूर का दीप, शुद्ध जल, पुष्प, भैरव चित्र/यंत्र, सरसों-तेल दीप, स्वच्छ आसन तथा रुद्राक्ष माला तैयार रखें।

स्नान व शुद्धि

प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख करके आसन पर बैठें। मन को शांत करें।

दीप व प्रणाम

काल भैरव के चित्र/यंत्र के सम्मुख दीप जलाएँ, पुष्प व जल अर्पित कर श्रद्धा से प्रणाम करें।

संकल्प

दाहिने हाथ में जल लेकर अपना नाम, गोत्र, स्थान व उद्देश्य (रक्षा, न्याय व ऋण-मुक्ति) कहकर संकल्प लें।

माला जप

रुद्राक्ष माला से मंत्र का शुद्ध, स्पष्ट उच्चारण करते हुए कम-से-कम एक माला (108 बार) जप करें। सुमेरु (मेरु मणि) को न लाँघें — वहाँ से माला पलटकर पुनः जपें।

ध्यान

जप के साथ काल भैरव के दिव्य स्वरूप व कृपा-प्रकाश का ध्यान करें और भाव रखें कि उनकी कृपा आप पर बरस रही है।

समर्पण

जप पूर्ण होने पर हाथ जोड़कर समस्त जप काल भैरव को समर्पित करें और प्रसाद ग्रहण करें।

⏰ श्रेष्ठ समय व नियम

🔱 सावधानी: उग्र भैरव-प्रयोग गुरु मार्गदर्शन में करें।

❓ प्रश्न-उत्तर

काल भैरव मंत्र का अर्थ क्या है?काल व भय के स्वामी काल भैरव को नमन — काशी के कोतवाल।
काल भैरव मंत्र कितनी बार जपना चाहिए?नित्य 108 बार।
क्या इसे जपने के लिए दीक्षा आवश्यक है?नित्य 108 जप श्रद्धा से कोई भी कर सकता है, दीक्षा अनिवार्य नहीं। विशेष अनुष्ठान, सम्पुट व हवन के लिए गुरु मार्गदर्शन उचित है।
काल भैरव मंत्र जपने का सर्वोत्तम समय कौन-सा है?रात्रि, रविवार व भैरव अष्टमी श्रेष्ठ।

🔱 विधिवत अनुष्ठान / व्यक्तिगत मंत्र-मार्गदर्शन

अपनी कुंडली अनुसार सही मंत्र, यंत्र व साधना जानने हेतु आचार्य जी से मार्गदर्शन लें।

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