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🔥 काली · गायत्री

॥ काली गायत्री मंत्र ॥

माँ काली के ध्यान हेतु गायत्री-मंत्र — साहस, रक्षा व आत्मबल का साधन।

देवतामाँ काली
प्रकारगायत्री मंत्र
जप संख्या108 नित्य
मालारुद्राक्ष/स्फटिक
श्रेष्ठ समयरात्रि
दिनअमावस्या
ॐ कालिकायै च विद्महे श्मशानवासिन्यै च धीमहि।
तन्नो अघोरा प्रचोदयात्॥
Om Kaalikaayai cha vidmahe Shmashaana-vaasinyai cha dheemahi. Tanno Aghoraa prachodayaat.
"We meditate upon Goddess Kalika, dweller of the cremation ground; may the fearless Aghora inspire us."

📖 शब्दार्थ (Word-by-Word)

कालिकायै च विद्महेहम कालिका को जानते हैं
श्मशानवासिन्यै च धीमहिश्मशान-वासिनी का ध्यान करते हैं
तन्नो अघोरा प्रचोदयात्वे अघोरा (निर्भय) हमें प्रेरित करें

🕉️ विस्तृत व्याख्या

यह गायत्री-छंद में माँ काली की स्तुति है। 'श्मशानवासिनी' का भाव है — जो जीवन-मृत्यु के परे, अहंकार के अंत में प्रकट होती हैं। 'अघोरा' अर्थात जो भयरहित व सौम्य हैं।

यह मंत्र साधक में निर्भयता, साहस व आत्मबल जगाता है और मृत्यु-भय पर विजय का भाव देता है।

🌿 लाभ

निर्भयता व साहस
रक्षा व आत्मबल
अहंकार-क्षय
आध्यात्मिक जागरण

🪔 सम्पूर्ण साधना विधि

सामग्री व तैयारी

घी या कपूर का दीप, शुद्ध जल, पुष्प, काली चित्र/यंत्र, दीप, स्वच्छ आसन तथा रुद्राक्ष या स्फटिक माला तैयार रखें।

स्नान व शुद्धि

प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख करके आसन पर बैठें। मन को शांत करें।

दीप व प्रणाम

माँ काली के चित्र/यंत्र के सम्मुख दीप जलाएँ, पुष्प व जल अर्पित कर श्रद्धा से प्रणाम करें।

संकल्प

दाहिने हाथ में जल लेकर अपना नाम, गोत्र, स्थान व उद्देश्य (साहस, रक्षा व आत्मबल) कहकर संकल्प लें।

माला जप

रुद्राक्ष या स्फटिक माला से मंत्र का शुद्ध, स्पष्ट उच्चारण करते हुए कम-से-कम एक माला (108 बार) जप करें। सुमेरु (मेरु मणि) को न लाँघें — वहाँ से माला पलटकर पुनः जपें।

ध्यान

जप के साथ माँ काली के दिव्य स्वरूप व कृपा-प्रकाश का ध्यान करें और भाव रखें कि उनकी कृपा आप पर बरस रही है।

समर्पण

जप पूर्ण होने पर हाथ जोड़कर समस्त जप माँ काली को समर्पित करें और प्रसाद ग्रहण करें।

⏰ श्रेष्ठ समय व नियम

❓ प्रश्न-उत्तर

काली गायत्री का अर्थ क्या है?हम कालिका का ध्यान करते हैं; निर्भय अघोरा हमें प्रेरित करें।
काली गायत्री कितनी बार जपना चाहिए?नित्य 108 बार।
क्या इसे जपने के लिए दीक्षा आवश्यक है?नित्य 108 जप श्रद्धा से कोई भी कर सकता है, दीक्षा अनिवार्य नहीं। विशेष अनुष्ठान, सम्पुट व हवन के लिए गुरु मार्गदर्शन उचित है।
काली गायत्री जपने का सर्वोत्तम समय कौन-सा है?रात्रि व अमावस्या श्रेष्ठ।

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