☄️ छाया-ग्रह · केतु
॥ ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः ॥
केतु ग्रह की शांति हेतु प्रामाणिक मंत्र — केतु दोष, काल सर्प दोष, केतु महादशा/अंतर्दशा, अकारण रोग, वैराग्य-अस्थिरता व आध्यात्मिक बाधाओं के निवारण हेतु।
ग्रहकेतु (छाया-ग्रह)
बीजस्रां स्रीं स्रौं
जप संख्या108 नित्य · 17000 अनुष्ठान
मालारुद्राक्ष (9-मुखी)/लहसुनिया
दिनमंगलवार/बुधवार
दिशानैऋत्य
बीज मंत्र (नित्य जप हेतु)
॥ ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः ॥
Om Sraam Sreem Sraum Sah Ketave Namah
Om — salutations to Ketu (the south lunar node), through his seed-syllables Sraam Sreem Sraum.
वैदिक मंत्र
॥ ॐ केतुं कृण्वन्नकेतवे पेशो मर्या अपेशसे।
समुषद्भिरजायथाः॥
Om Ketum Krinvann-aketave Pesho Maryaa Apeshase,
Sam-ushadbhir-ajaayathaah.
The traditional Vedic invocation of Ketu, giver of light to the light-less.
केतु गायत्री
॥ ॐ चित्रवर्णाय विद्महे सर्परूपाय धीमहि।
तन्नो केतुः प्रचोदयात्॥
Om Chitra-varnaaya Vidmahe Sarpa-roopaaya Dheemahi,
Tanno Ketuh Prachodayaat.
May we know the many-hued one, meditate on the serpent-formed; may Ketu inspire us.
📖 शब्दार्थ (Word-by-Word)
| ॐ (Om) | प्रणव — मूल नाद |
| स्रां स्रीं स्रौं | केतु के तीन बीजाक्षर |
| सः (Sah) | शक्ति-बीज |
| केतवे नमः | केतु ग्रह को नमन |
🕉️ विस्तृत व्याख्या
केतु एक छाया-ग्रह है — चंद्र की दक्षिण पात (south node), राहु का पूरक। यह वैराग्य, मोक्ष, रहस्य-विद्या, अचानक घटनाओं व पूर्व-कर्मों का कारक है। अशुभ केतु अकारण रोग, भ्रम, अस्थिरता व आध्यात्मिक बेचैनी दे सकता है; शुभ होने पर गहन आध्यात्मिक उन्नति व सिद्धि देता है।
यह मंत्र केतु की ऊर्जा को संतुलित कर, रोग-निवृत्ति, स्थिरता व आत्म-ज्ञान देता है। काल सर्प दोष में राहु-केतु दोनों की शांति करें — देखें: काल सर्प दोष क्या है।
🌿 लाभ
केतु दोष व काल सर्प दोष में शांति
केतु महादशा/अंतर्दशा की पीड़ा-शमन
अकारण/जटिल रोगों में राहत
मानसिक अस्थिरता व भ्रम दूर
आध्यात्मिक उन्नति, ध्यान व मोक्ष-मार्ग में सहायक
शत्रु-बाधा व नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा
🪔 सम्पूर्ण साधना विधि
सामग्री
तिल-तेल का दीप, धूम्र/मिश्रित रंग के पुष्प, केतु यंत्र/चित्र, नारियल, कुल्थी (horse-gram) या तिल, शुद्ध जल, आसन व रुद्राक्ष (9-मुखी) या लहसुनिया माला।स्नान व शुद्धि
स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें; नैऋत्य दिशा की ओर मुख करके आसन पर बैठें, मन शांत करें।दीप व प्रणाम
केतु यंत्र/चित्र के सम्मुख तिल-तेल का दीप जलाएँ, पुष्प व जल अर्पित कर प्रणाम करें।संकल्प
दाहिने हाथ में जल लेकर नाम, गोत्र, स्थान व उद्देश्य (केतु-दोष/काल सर्प शांति) कहकर संकल्प लें।माला जप
रुद्राक्ष/लहसुनिया माला से मंत्र का शुद्ध उच्चारण करते हुए एक माला (108 बार) जप करें। सुमेरु को न लाँघें।ध्यान
जप के साथ केतु की ऊर्जा संतुलित होकर मन में स्थिरता व आत्म-प्रकाश भरते हुए अनुभव करें।समर्पण
जप पूर्ण होने पर समस्त जप केतु देव को समर्पित करें; कुल्थी/तिल व नारियल दान करें।
⏰ श्रेष्ठ समय व नियम
- समय: संध्या।
- विशेष दिन: मंगलवार अथवा बुधवार।
- नियमितता: 40 दिन नियमित जप से विशेष लाभ।
- दान: कुल्थी, तिल, कम्बल, नारियल व सप्तधान्य का दान शुभ।
- आचार: सात्विक आहार, सत्य व संयम।
⚠️ सावधानी: लहसुनिया (Cat's Eye) रत्न केवल योग्य ज्योतिषी से कुंडली दिखाकर ही धारण करें। काल सर्प दोष व केतु महादशा की विशेष शांति गुरु-मार्गदर्शन में करें। सामान्य भक्त नित्य 108 जप श्रद्धा से कर सकते हैं।
❓ प्रश्न-उत्तर
केतु मंत्र का अर्थ क्या है?केतु के तीन बीजाक्षरों (स्रां स्रीं स्रौं) व शक्ति-बीज (सः) सहित केतु ग्रह को नमन।
केतु मंत्र कितनी बार जपें?नित्य 108 बार; पूर्ण अनुष्ठान में 17,000 जप।
किसे केतु मंत्र जपना चाहिए?जिनकी कुंडली में केतु अशुभ हो, काल सर्प दोष हो, या केतु महादशा/अंतर्दशा चल रही हो।
क्या दीक्षा आवश्यक है?नित्य 108 जप श्रद्धा से कोई भी कर सकता है; विशेष अनुष्ठान हेतु आचार्य-मार्गदर्शन उचित।
सर्वोत्तम समय?मंगलवार/बुधवार संध्या।