होममंत्र संग्रह › नवार्ण मंत्र
🦁 दुर्गा · नवार्ण मुख्य मंत्र

॥ नवार्ण (नवाक्षरी) मंत्र ॥

दुर्गा सप्तशती का मूल नौ-अक्षर मंत्र — महासरस्वती (ऐं), महालक्ष्मी (ह्रीं) व महाकाली (क्लीं) की समग्र शक्ति।

देवतामाँ चामुण्डा/दुर्गा
प्रकारनवाक्षरी मूल मंत्र
बीजऐं · ह्रीं · क्लीं
जप संख्या108 नित्य · नवरात्रि विशेष
मालारुद्राक्ष/स्फटिक
श्रेष्ठ समयनवरात्रि · अष्टमी
👆 अपनी सुविधा अनुसार भाषा चुनें — पूरा पेज उसी भाषा में पढ़ें (मंत्र, अर्थ, विधि सब) 🙏
॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥

📖 शब्दार्थ (Word-by-Word)

ऐं (Aim)महासरस्वती — ज्ञान-शक्ति का बीज
ह्रीं (Hreem)महालक्ष्मी — माया व ऐश्वर्य का बीज
क्लीं (Kleem)महाकाली — इच्छा व संहार-शक्ति का बीज
चामुण्डायैचण्ड-मुण्ड का नाश करने वाली देवी को
विच्चेहे देवी, मुझमें प्रकट/प्रविष्ट हों

🕉️ विस्तृत व्याख्या

यह दुर्गा सप्तशती (चण्डी) का सर्वप्रधान मंत्र है, जिसे 'नवार्ण' (नौ अक्षर) कहा जाता है। इसके तीन बीज — ऐं, ह्रीं, क्लीं — क्रमशः महासरस्वती, महालक्ष्मी व महाकाली की समग्र शक्ति के प्रतीक हैं। 'चामुण्डायै' चण्ड-मुण्ड-मर्दिनी देवी को संबोधन है।

सप्तशती के प्रत्येक पाठ से पूर्व-पश्चात इसी मंत्र का जप होता है। यह मंत्र सर्व-सिद्धि, रक्षा व मनोकामना-पूर्ति का महामंत्र माना जाता है। विधिवत अनुष्ठान गुरु मार्गदर्शन में श्रेष्ठ है।

🌿 लाभ

सर्व-सिद्धि व मनोकामना-पूर्ति
शत्रु-बाधा व नकारात्मकता नाश
भय-मुक्ति व आत्मबल
रोग व ग्रह-दोष शांति
देवी-कृपा व रक्षा-कवच

🪔 सम्पूर्ण साधना विधि

सामग्री व तैयारी

घी या कपूर का दीप, शुद्ध जल, पुष्प, दुर्गा/चामुण्डा चित्र या यंत्र, लाल पुष्प, स्वच्छ आसन तथा रुद्राक्ष या स्फटिक माला तैयार रखें।

स्नान व शुद्धि

प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख करके आसन पर बैठें। मन को शांत करें।

दीप व प्रणाम

माँ दुर्गा के चित्र/यंत्र के सम्मुख दीप जलाएँ, पुष्प व जल अर्पित कर श्रद्धा से प्रणाम करें।

संकल्प

दाहिने हाथ में जल लेकर अपना नाम, गोत्र, स्थान व उद्देश्य (रक्षा, सिद्धि व मनोकामना) कहकर संकल्प लें।

माला जप

रुद्राक्ष या स्फटिक माला से मंत्र का शुद्ध, स्पष्ट उच्चारण करते हुए कम-से-कम एक माला (108 बार) जप करें। सुमेरु (मेरु मणि) को न लाँघें — वहाँ से माला पलटकर पुनः जपें।

ध्यान

जप के साथ माँ दुर्गा के दिव्य स्वरूप व कृपा-प्रकाश का ध्यान करें और भाव रखें कि उनकी कृपा आप पर बरस रही है।

समर्पण

जप पूर्ण होने पर हाथ जोड़कर समस्त जप माँ दुर्गा को समर्पित करें और प्रसाद ग्रहण करें।

⏰ श्रेष्ठ समय व नियम

⚠️ सावधानी: 🔱 सावधानी: नवार्ण के विनियोग, न्यास व सम्पुट-सहित अनुष्ठान गुरु दीक्षा में करें। नित्य 108 नाम-जप सभी कर सकते हैं।

📜 स्रोत व कथा

यह मंत्र मार्कण्डेय पुराण अंतर्गत दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) की मूल कुंजी है। कवच-अर्गला-कीलक के साथ इसका जप सप्तशती-पाठ का अंग है।

🔱 इस मंत्र व साधना को सुव्यवस्थित, गुरु-निर्देशित रूप में आगे बढ़ाने हेतु दुर्गा सप्तशती साधना उपलब्ध है — घर बैठे सम्पूर्ण विधि व मार्गदर्शन सहित।

❓ प्रश्न-उत्तर

नवार्ण मंत्र का अर्थ क्या है?तीन बीज (ऐं-ह्रीं-क्लीं) सहित चामुण्डा देवी को नमन व आवाहन — सर्वशक्ति का मंत्र।
नवार्ण मंत्र कितनी बार जपना चाहिए?नित्य 108 बार; नवरात्रि में सप्तशती-पाठ सहित अधिक।
क्या इसे जपने के लिए दीक्षा आवश्यक है?नित्य 108 जप श्रद्धा से कोई भी कर सकता है, दीक्षा अनिवार्य नहीं। विशेष अनुष्ठान, सम्पुट व हवन के लिए गुरु मार्गदर्शन उचित है।
नवार्ण मंत्र जपने का सर्वोत्तम समय कौन-सा है?नवरात्रि, अष्टमी व प्रातः ब्रह्म मुहूर्त श्रेष्ठ।

🔱 विधिवत अनुष्ठान / व्यक्तिगत मार्गदर्शन

अपनी कुंडली अनुसार सही मंत्र, यंत्र व उपाय जानने हेतु आचार्य जी से मार्गदर्शन लें।

प्रश्न पूछें (₹151) मंत्र संग्रह कुंडली विश्लेषण

📿 इस मंत्र हेतु अभिमंत्रित यंत्र व माला

जप की पूर्ण सिद्धि हेतु गुरु अमिताचार्य जी द्वारा प्राण-प्रतिष्ठित यंत्र व माला — घर तक सुरक्षित डिलीवरी। किसी भी साधना/अनुष्ठान से पहले महाकाली तंत्र पीठ से परामर्श अवश्य लें।

🔱 सिद्ध यंत्र व माला — Store🪔 विधिवत पूजा/अनुष्ठान बुक करें
online·👁