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🔱 शिव · गायत्री

॥ रुद्र गायत्री मंत्र ॥

महादेव के ध्यान हेतु गायत्री-छंद में रचित मंत्र — बुद्धि, चेतना-जागरण व शिव-कृपा का साधन।

देवताभगवान रुद्र/शिव
प्रकारगायत्री मंत्र
जप संख्या108 नित्य
मालारुद्राक्ष
श्रेष्ठ समयप्रातः संध्या
दिनसोमवार
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि।
तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥
Om Tatpurushaaya vidmahe Mahaadevaaya dheemahi. Tanno Rudrah prachodayaat.
"We meditate upon the Supreme Person, the Great God; may Rudra inspire and awaken our intellect."

📖 शब्दार्थ (Word-by-Word)

तत्पुरुषाय विद्महेहम उस परम पुरुष को जानते हैं
महादेवाय धीमहिमहादेव का हम ध्यान करते हैं
तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्वे रुद्र हमारी बुद्धि को प्रेरित करें

🕉️ विस्तृत व्याख्या

यह गायत्री-छंद में महादेव की स्तुति है। इसमें साधक शिव को 'तत्पुरुष' (परम चेतन पुरुष) व 'महादेव' कहकर उनका ध्यान करता है और प्रार्थना करता है कि रुद्र उसकी बुद्धि व विवेक को जागृत करें।

गायत्री मंत्रों का उद्देश्य बुद्धि व अंतःकरण का प्रकाशन है। रुद्र गायत्री विशेष रूप से एकाग्रता, ज्ञान व शिव-चेतना जागरण के लिए जपी जाती है।

🌿 लाभ

बुद्धि व विवेक का जागरण
एकाग्रता व स्मरण-शक्ति
शिव-कृपा व रक्षा
मानसिक शांति

🪔 सम्पूर्ण साधना विधि

सामग्री व तैयारी

घी या कपूर का दीप, शुद्ध जल, पुष्प, शिव चित्र/शिवलिंग, स्वच्छ आसन तथा रुद्राक्ष माला तैयार रखें।

स्नान व शुद्धि

प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख करके आसन पर बैठें। मन को शांत करें।

दीप व प्रणाम

भगवान रुद्र/शिव के चित्र/यंत्र के सम्मुख दीप जलाएँ, पुष्प व जल अर्पित कर श्रद्धा से प्रणाम करें।

संकल्प

दाहिने हाथ में जल लेकर अपना नाम, गोत्र, स्थान व उद्देश्य (बुद्धि-जागरण व शिव-कृपा) कहकर संकल्प लें।

माला जप

रुद्राक्ष माला से मंत्र का शुद्ध, स्पष्ट उच्चारण करते हुए कम-से-कम एक माला (108 बार) जप करें। सुमेरु (मेरु मणि) को न लाँघें — वहाँ से माला पलटकर पुनः जपें।

ध्यान

जप के साथ भगवान रुद्र/शिव के दिव्य स्वरूप व कृपा-प्रकाश का ध्यान करें और भाव रखें कि उनकी कृपा आप पर बरस रही है।

समर्पण

जप पूर्ण होने पर हाथ जोड़कर समस्त जप भगवान रुद्र/शिव को समर्पित करें और प्रसाद ग्रहण करें।

⏰ श्रेष्ठ समय व नियम

❓ प्रश्न-उत्तर

रुद्र गायत्री का अर्थ क्या है?हम महादेव का ध्यान करते हैं; रुद्र हमारी बुद्धि को प्रेरित करें।
रुद्र गायत्री कितनी बार जपना चाहिए?नित्य 108 बार, प्रातः संध्या में।
क्या इसे जपने के लिए दीक्षा आवश्यक है?नित्य 108 जप श्रद्धा से कोई भी कर सकता है, दीक्षा अनिवार्य नहीं। विशेष अनुष्ठान, सम्पुट व हवन के लिए गुरु मार्गदर्शन उचित है।
रुद्र गायत्री जपने का सर्वोत्तम समय कौन-सा है?प्रातः व सायं संध्या काल श्रेष्ठ।

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