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🌟 द्वितीय महाविद्या · तारा

॥ ॐ ह्रीं स्त्रीं हुं फट् ॥

भव-सागर से तारने वाली द्वितीय महाविद्या तारा (नील-सरस्वती) का मंत्र — वाणी-सिद्धि, विद्या-बुद्धि, संकट-रक्षा व आध्यात्मिक मार्गदर्शन हेतु।

देवीतारा (उग्र-तारा · नील-सरस्वती)
महाविद्याद्वितीय
बीजस्त्रीं
जप संख्या108 नित्य
मालारुद्राक्ष/स्फटिक
दिन · दिशाबुध/रवि · उत्तर
मूल/बीज मंत्र (नित्य जप)
॥ ॐ ह्रीं स्त्रीं हुं फट् ॥
Om Hreem Streem Hum Phat
Om — with the seed-syllables Hreem, Streem, Hum, Phat, salutations to Ugra-Tara, who ferries the soul across.
तारा गायत्री
॥ ॐ तारायै विद्महे महोग्रायै धीमहि।
तन्नो देवी प्रचोदयात्॥
Om Taaraayai Vidmahe Mahogrraayai Dheemahi,
Tanno Devee Prachodayaat.
May we know Tara, meditate on the fierce Mother; may that Goddess inspire us.

📖 शब्दार्थ (Word-by-Word)

ॐ (Om)प्रणव
ह्रीं (Hreem)माया-बीज
स्त्रीं (Streem)तारा का मुख्य बीज
हुं (Hum)कवच-बीज (रक्षा)
फट् (Phat)अस्त्र-बीज (बाधा-नाश)

🕉️ विस्तृत व्याख्या

तारा द्वितीय महाविद्या हैं — जो भव-सागर से पार लगाती (तारती) हैं। नील-सरस्वती रूप में वे वाणी, ज्ञान व शब्द-ब्रह्म की अधिष्ठात्री हैं; अंधकार में मार्ग दिखाने वाली तारिका। यह मंत्र वाणी-दोष, विद्या-बाधा, निर्णय-असमंजस व संकट में विशेष लाभकारी है।

तारा के पूर्ण गूढ़ ज्ञान हेतु देखें: दस महाविद्या — तारा

🌿 लाभ

वाक्-सिद्धि व प्रभावशाली वाणी
विद्या, बुद्धि व एकाग्रता
संकट, यात्रा-भय व बाधा से रक्षा
निर्णय-क्षमता व धैर्य
आध्यात्मिक मार्गदर्शन व स्थिरता

🪔 सम्पूर्ण साधना विधि

सामग्री

शुद्ध जल, नील/श्वेत पुष्प, तारा यंत्र/चित्र, घी अथवा तिल-तेल का दीप, आसन व रुद्राक्ष/स्फटिक माला।

स्नान व शुद्धि

प्रातः स्नान कर स्वच्छ (नील/श्वेत) वस्त्र पहनें; उत्तर दिशा की ओर मुख करके आसन पर बैठें।

दीप व प्रणाम

तारा यंत्र/चित्र के सम्मुख दीप जलाएँ, पुष्प व जल अर्पित कर प्रणाम करें।

संकल्प

दाहिने हाथ में जल लेकर नाम, गोत्र, स्थान व उद्देश्य (वाणी/विद्या-सिद्धि · संकट-रक्षा) कहकर संकल्प लें।

माला जप

माला से मंत्र का शुद्ध, स्पष्ट उच्चारण करते हुए कम-से-कम एक माला (108) जप करें। सुमेरु न लाँघें।

ध्यान

जप के साथ नील-प्रकाशमयी तारा माता की कृपा व ज्ञान-प्रकाश का ध्यान करें।

समर्पण

जप पूर्ण होने पर समस्त जप माता को समर्पित करें व प्रसाद ग्रहण करें।

⏰ श्रेष्ठ समय व नियम

⚠️ सावधानी: उग्र-तारा की गूढ़/उग्र साधना बिना गुरु-दीक्षा व मार्गदर्शन के न करें। सामान्य भक्त नित्य 108 जप व तारा गायत्री श्रद्धा से कर सकते हैं। विशेष अनुष्ठान गुरु-मार्गदर्शन में।

❓ प्रश्न-उत्तर

तारा मंत्र का अर्थ क्या है?माया-बीज (ह्रीं), तारा-बीज (स्त्रीं), कवच (हुं) व अस्त्र (फट्) सहित उग्र-तारा को नमन — जो वाणी व ज्ञान देकर संकट से तारती हैं।
तारा मंत्र कितनी बार जपें?नित्य 108 बार; विशेष अनुष्ठान गुरु-मार्गदर्शन में।
क्या दीक्षा आवश्यक है?नित्य 108 जप व तारा गायत्री श्रद्धा से कोई भी कर सकता है; उग्र-तारा की विशेष साधना हेतु गुरु-दीक्षा आवश्यक।
सर्वोत्तम समय?प्रातः/ब्रह्म-मुहूर्त, बुधवार अथवा रविवार।

🔱 विधिवत अनुष्ठान / व्यक्तिगत मार्गदर्शन

अपनी कुंडली अनुसार सही मंत्र, यंत्र व उपाय जानने हेतु आचार्य जी से मार्गदर्शन लें।

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