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दुर्गा सप्तशती प्रयोग

दुर्गा सप्तशती प्रयोग — अध्याय व सम्पुट अनुसार मनोकामना-सिद्धि

आचार्य अमिताचार्य द्वारा · प्रयोग-शास्त्र · पढ़ने का समय ~7 मिनट

📖 इस लेख में
  1. प्रयोग क्या है?
  2. सम्पुट प्रयोग
  3. अध्याय-अनुसार फल
  4. प्रयोग विधि
  5. सावधानियाँ
  6. प्रश्न-उत्तर

दुर्गा सप्तशती प्रयोग क्या है?

दुर्गा सप्तशती केवल पाठ का ग्रंथ नहीं, अपितु प्रयोग-शास्त्र भी है। "प्रयोग" अर्थात् किसी विशेष मनोकामना की सिद्धि हेतु सप्तशती के निश्चित अध्याय, श्लोक या सम्पुट-मंत्र का विधिपूर्वक पाठ। जैसे नवार्ण मंत्र इसका मूल है, वैसे ही अध्याय-अनुसार व सम्पुट-अनुसार पाठ इसकी प्रयोग-विधियाँ हैं। यहाँ प्रामाणिक, शास्त्र-सम्मत प्रयोगों का सार प्रस्तुत है।

🔱 आधार: यह लेख मार्कण्डेय पुराण-अंतर्गत देवी माहात्म्य (सप्तशती) की प्रचलित प्रयोग-परंपरा पर आधारित है। पूर्ण न्यास, संकल्प व सिद्धि-रहस्य गुरु-दीक्षा में ही दिए जाते हैं।

सम्पुट प्रयोग — मनोकामना की कुंजी

सम्पुट का अर्थ है "घेरना"। सप्तशती के प्रत्येक श्लोक के आगे और पीछे एक निश्चित मंत्र जोड़कर पाठ करने से वह मंत्र-शक्ति सम्पूर्ण सप्तशती के तेज से आवेष्टित हो जाती है — यही सम्पुट प्रयोग है। कुछ प्रसिद्ध व प्रामाणिक सम्पुट:

मनोकामनासम्पुट मंत्र (सप्तशती से)
रोग-नाश व आरोग्यरोगानशेषानपहंसि तुष्टा रुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान्।
भय, बाधा व संकट-नाशसर्वाबाधा प्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि।
दरिद्रता-नाश व समृद्धिदुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोः।
सर्व-कल्याण व रक्षासर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।

सम्पुट पाठ में प्रत्येक श्लोक इस प्रकार पढ़ा जाता है — [सम्पुट मंत्र] → श्लोक → [सम्पुट मंत्र]। यह प्रयोग संकल्पपूर्वक, नियत दिनों तक करने से विशेष फलदायी माना गया है।

अध्याय-अनुसार प्रयोग व फल

परंपरा में सप्तशती के तेरह अध्यायों का पृथक्-पृथक् फल बताया गया है। किसी विशेष कामना हेतु सम्पूर्ण पाठ के साथ उस अध्याय का अतिरिक्त पाठ किया जाता है:

अध्यायचरित्रप्रमुख फल (परंपरा अनुसार)
1प्रथमचिंता-नाश, मानसिक शांति, कार्य-आरंभ में सफलता
2–4मध्यमशत्रु-बाधा शमन, विवाद/मुकदमे में विजय, ऐश्वर्य व भक्ति
5–6उत्तमभय, प्रेत-पीड़ा व नकारात्मक शक्ति से रक्षा
7–8उत्तमशत्रु-संहार, बंधन-मुक्ति, संकट से उद्धार
9–10उत्तमवियोग-निवारण, संतान-सुख, इष्ट-मिलन
11उत्तम (नारायणी स्तुति)सर्व-कल्याण, ऐश्वर्य, मोक्ष व कृपा-प्राप्ति
12–13उत्तम (फल-श्रुति)सर्व-रक्षा, वर-प्राप्ति व मनोकामना-पूर्ति

नोट: विभिन्न परंपराओं में अध्याय-फल में थोड़ा भेद मिलता है; ऊपर सर्वसम्मत सार दिया गया है। सूक्ष्म प्रयोग गुरु-निर्देश में करें।

प्रयोग की सामान्य विधि

  1. प्रातः स्नान कर लाल/पीले आसन पर पूर्व या उत्तर मुख बैठें; माँ के चित्र/यंत्र के सम्मुख दीप-धूप जलाएँ।
  2. आचमन कर नाम, गोत्र, स्थान व स्पष्ट मनोकामना सहित संकल्प लें (कितने दिन/कितने पाठ का)।
  3. पाठ से पूर्व देवी कवच, अर्गला व कीलक स्तोत्र पढ़ें; फिर नवार्ण मंत्र की एक माला जप करें।
  4. चुने हुए सम्पुट/अध्याय सहित शुद्ध, स्पष्ट उच्चारण में पाठ करें; बीच में चरित्र अधूरा न छोड़ें।
  5. अंत में क्षमा-प्रार्थना, आरती व मनोकामना-निवेदन करें; प्रसाद वितरित करें।
🔱 नवार्ण मंत्र: ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥

यदि सम्पूर्ण पाठ संभव न हो, तो सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ करें — यह समस्त कीलकों की "कुंजी" है और सप्तशती के प्रयोग-फल का सरल मार्ग है। विस्तार: सिद्ध कुंजिका तांत्रिक रहस्य · सम्पूर्ण पाठ-क्रम: दुर्गा सप्तशती पाठ विधि

सावधानियाँ

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प्रश्न-उत्तर (FAQ)

सम्पुट प्रयोग क्या होता है?

सप्तशती के प्रत्येक श्लोक के आगे-पीछे एक निश्चित मंत्र (सम्पुट) जोड़कर पाठ करना, जिससे विशेष मनोकामना सिद्ध होती है।

कौन-सा सम्पुट किसके लिए?

रोग हेतु 'रोगानशेषान…', भय-बाधा हेतु 'सर्वाबाधा प्रशमनं…', समृद्धि हेतु 'दुर्गे स्मृता…', सर्व-कल्याण हेतु 'सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये…'।

क्या पूरा पाठ जरूरी है?

पूर्ण पाठ श्रेष्ठ है; समय न हो तो सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ करें — वह सप्तशती के फल की कुंजी है।

क्या दीक्षा आवश्यक है?

सामान्य पाठ कोई भी कर सकता है; विशेष सम्पुट-प्रयोग व अनुष्ठान गुरु-दीक्षा में करें।

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