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रुद्राभिषेक पूजन विधि

रुद्राभिषेक पूजन विधि — अभिषेक द्रव्य, मंत्र व सम्पूर्ण विधि

आचार्य अमिताचार्य द्वारा · कर्मकांड · पढ़ने का समय ~7 मिनट

📖 इस लेख में
  1. रुद्राभिषेक क्या है व महत्व
  2. कब व किसलिए कराएँ
  3. अभिषेक द्रव्य व उनका फल
  4. सामग्री
  5. पूजन विधि
  6. प्रमुख मंत्र
  7. लाभ
  8. सावधानी
  9. प्रश्न-उत्तर

रुद्राभिषेक क्या है व महत्व

रुद्राभिषेक का अर्थ है — भगवान शिव के रुद्र स्वरूप का पवित्र द्रव्यों से अभिषेक। इसमें शिवलिंग पर जल, दूध, दही, घी, शहद, शर्करा, गंगाजल व पंचामृत आदि की सतत धारा अर्पित करते हुए रुद्र-मंत्रों का उच्चारण किया जाता है। ये मंत्र मुख्यतः शुक्ल यजुर्वेद के अंतर्गत आने वाले रुद्री — अर्थात् नमकम् व चमकम् — से लिए जाते हैं, जिनमें रुद्रदेव की स्तुति व उनसे कल्याण की प्रार्थना की जाती है।

शास्त्रों में शिव को अभिषेक-प्रिय कहा गया है — अर्थात् वे जल-धारा व सरल श्रद्धा से शीघ्र प्रसन्न होने वाले देव हैं। रुद्राभिषेक केवल कर्मकांड नहीं, अपितु मंत्र-जप, ध्यान व अर्पण का समन्वित साधना-रूप है। रुद्री का एक बार पाठ भी अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है; ग्यारह आवृत्ति को एकादश रुद्री तथा उसके गुणकों में रुद्र, महारुद्र व अतिरुद्र अनुष्ठान संपन्न किए जाते हैं।

🔱 अभिषेक-द्रव्य व मंत्र-संख्या का चयन संकल्प व मनोकामना के अनुसार किया जाता है। विस्तृत स्तुति हेतु लिंगाष्टकम् का पाठ भी अभिषेक के साथ किया जा सकता है।

कब व किसलिए कराएँ

रुद्राभिषेक किसी भी शुभ दिन में किया जा सकता है, परंतु कुछ अवसर विशेष फलदायी माने जाते हैं —

किसलिए कराया जाता है — इसका निर्धारण संकल्प के अनुसार होता है। सामान्यतः रुद्राभिषेक आरोग्य व दीर्घायु, ऋण-मुक्ति व आर्थिक बाधा-निवारण, ग्रह-शांति व दोष-निवारण तथा मनोकामना-पूर्ति के भाव से कराया जाता है। संकल्प के अनुसार ही अभिषेक-द्रव्य का चयन भी किया जाता है।

अभिषेक द्रव्य व उनका फल

परंपरा में विभिन्न द्रव्यों से अभिषेक के भिन्न-भिन्न फल बताए गए हैं। यजमान अपनी मनोकामना के अनुसार द्रव्य का चयन करता है —

अभिषेक द्रव्यफल / भाव
जल (शुद्ध जल)शांति, शीतलता व वृष्टि (वर्षा) की कामना
दूधसंतान-सुख, आरोग्य व दीर्घायु
दहीपशु-धन व समृद्धि
घीवंश-वृद्धि व आरोग्य
शहद (मधु)धन-प्राप्ति व ऋण-मुक्ति
शर्करा / शक्करसुख व मधुरता की वृद्धि
गंगाजलपाप-नाश व मोक्ष
गन्ने का रस (गन्ना-रस)लक्ष्मी-प्राप्ति व धन-वृद्धि
पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शर्करा)सर्व-मनोकामना की पूर्ति
भस्म (विभूति)रोग-नाश व वैराग्य-शुद्धि
सुगंधित जल / इत्र-जलयश, सौभाग्य व मन की प्रसन्नता
🔱 प्रत्येक द्रव्य-अभिषेक के पश्चात् शिवलिंग को शुद्ध जल से धोकर अगला द्रव्य अर्पित किया जाता है; अंत में गंगाजल से शुद्ध अभिषेक कर पूजन पूर्ण किया जाता है।

सामग्री

पूजन विधि

  1. स्नान व संकल्प: यजमान स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं; हाथ में जल, अक्षत व पुष्प लेकर देश-काल व अपने नाम-गोत्र सहित रुद्राभिषेक का संकल्प लेते हैं तथा मनोकामना का उच्चारण करते हैं।
  2. गणेश-गौरी व कलश पूजन: विघ्न-निवारण हेतु सर्वप्रथम श्रीगणेशमाँ गौरी का पूजन; तत्पश्चात् मंगल-कलश की स्थापना कर वरुण-आवाहन व षोडशोपचार पूजन।
  3. नंदी व शिव-परिवार पूजन: नंदी, कार्तिकेय, गणेश तथा शिव-परिवार व दिक्पालों का संक्षिप्त आवाहन-पूजन कर अभिषेक हेतु अनुमति-भाव से आरंभ।
  4. शिवलिंग स्थापना व आवाहन: शिवलिंग को जलहरी सहित स्थापित कर 'ॐ नमः शिवाय' से रुद्रदेव का आवाहन व ध्यान।
  5. पंचामृत अभिषेक: मंत्रोच्चार सहित क्रमशः दूध, दही, घी, शहद व शर्करा (पंचामृत) से अभिषेक; प्रत्येक द्रव्य के बीच शुद्ध जल से प्रक्षालन।
  6. रुद्री सहित मुख्य अभिषेक: पात्र से सतत जल-धारा अर्पित करते हुए पुरोहित द्वारा रुद्री (नमकम्-चमकम्) का पाठ; यजमान 'ॐ नमः शिवाय'महामृत्युंजय मंत्र का मन-ही-मन जप करते रहते हैं। संकल्प अनुसार चुने गए द्रव्य से अभिषेक इसी क्रम में किया जाता है।
  7. बिल्वपत्र अर्पण: अभिषेक के पश्चात् शिवलिंग पर अखंडित बिल्वपत्र, आक-धतूरा, चंदन व श्वेत पुष्प अर्पित; चंदन-त्रिपुंड्र व भस्म-अर्चन।
  8. धूप-दीप व नैवेद्य: धूप, घृत-दीप व कर्पूर से आराधना; फल-मिष्ठान्न का नैवेद्य अर्पण।
  9. आरती व क्षमा-प्रार्थना: शिव-आरती (ॐ जय शिव ओंकारा) कर परिक्रमा; ज्ञात-अज्ञात त्रुटियों हेतु क्षमा-प्रार्थना व अभिषेक-जल (चरणामृत) का वितरण। अंत में यथाशक्ति दान व प्रसाद-वितरण से समापन।

प्रमुख मंत्र

अभिषेक के समय यजमान मूल पंचाक्षर मंत्र तथा महामृत्युंजय मंत्र का जप करते रहें —

🕉️ ॐ नमः शिवाय
🕉️ ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥
🔱 महामृत्युंजय मंत्र आरोग्य, अकाल-मृत्यु-निवारण व दीर्घायु का महामंत्र है। इसके विस्तृत अर्थ, जप-विधि व माहात्म्य हेतु देखें — महामृत्युंजय मंत्र

लाभ

श्रद्धा व विधि सहित संपन्न रुद्राभिषेक के अनेक शुभ फल बताए गए हैं —

सावधानी

⚠️ रुद्री (नमकम्-चमकम्) का पाठ स्वर व उच्चारण की शुद्धता माँगता है — यह प्रशिक्षित पुरोहित द्वारा ही कराना चाहिए। अशुद्ध उच्चारण से संकल्प का पूर्ण फल नहीं मिलता। साधारण जल व 'ॐ नमः शिवाय' से घर पर अभिषेक किया जा सकता है, किंतु रुद्र/महारुद्र जैसे विशेष अनुष्ठान अनुभवी आचार्य के मार्गदर्शन में ही संपन्न कराएँ।

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प्रश्न-उत्तर (FAQ)

रुद्राभिषेक क्या है?

शिवलिंग का जल, दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल व पंचामृत आदि द्रव्यों से रुद्र-मंत्रों (शुक्ल यजुर्वेद की रुद्री/नमकम्-चमकम्) सहित किया जाने वाला अभिषेक ही रुद्राभिषेक है।

रुद्राभिषेक कब कराना श्रेष्ठ है?

श्रावण मास, प्रदोष, महाशिवरात्रि व सोमवार विशेष फलदायी हैं; आरोग्य, ऋण-मुक्ति, ग्रह-शांति व मनोकामना हेतु किसी भी शुभ दिन कराया जा सकता है।

किस द्रव्य से क्या फल मिलता है?

जल—शांति/वृष्टि, दूध—संतान-आरोग्य-दीर्घायु, दही—पशु-समृद्धि, घी—वंश-वृद्धि, शहद—धन/ऋण-मुक्ति, शर्करा—सुख, गन्ने का रस—लक्ष्मी, गंगाजल—मोक्ष व पंचामृत—सर्व-मनोकामना।

क्या रुद्राभिषेक घर पर स्वयं कर सकते हैं?

जल व 'ॐ नमः शिवाय' से सरल अभिषेक घर पर किया जा सकता है, परंतु रुद्री का शुद्ध पाठ प्रशिक्षित पुरोहित द्वारा ही कराना उचित है।

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