तारा शतनाम स्तोत्र में द्वितीय महाविद्या माँ तारा के एक सौ (शत) दिव्य नामों द्वारा स्तुति की जाती है। प्रत्येक नाम देवी के किसी विशेष गुण, रूप या कृपा-शक्ति का द्योतक है। तारा — जो भव-सागर से "तारने" वाली, नील-सरस्वती व उग्र-तारा रूपा हैं — की यह नामावली उनकी वाणी-सिद्धि, ज्ञान व संकट-रक्षा की महिमा गाती है।
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नामावली-पाठ का महत्व इसलिए है कि इसमें देवी का सम्पूर्ण स्वरूप नामों के माध्यम से स्मरण हो जाता है — साधक का मन एकाग्र होता है और श्रद्धा गहरी होती है। तारा की नामावली विशेष रूप से वाणी, विद्या, बुद्धि व निर्भयता की कामना से पढ़ी जाती है। महाविद्याओं में तारा को उग्र-सौम्य माना गया है — कठिन संकट में शीघ्र रक्षा करने वाली।
पूर्ण मंत्र, गायत्री व साधना विधि (3 भाषा में): तारा मंत्र पृष्ठ · गूढ़ ज्ञान: दस महाविद्या — तारा।
🔱 तारा जैसी उग्र महाविद्या-साधना पारम्परिक रूप से केवल गुरु-दीक्षा द्वारा ग्रहण की जाती है — श्रद्धा से नाम-स्मरण सभी कर सकते हैं।
नाम-स्मरण व स्तुति सभी श्रद्धालु कर सकते हैं। तारा की उग्र बीज-साधना, विशेष प्रयोग व अनुष्ठान केवल गुरु-दीक्षा व मार्गदर्शन में करें। श्मशान-साधना जैसे उग्र मार्ग सामान्य साधक हेतु नहीं हैं।
तारा की विधिवत बीज-साधना, दीक्षा व मंत्र-सिद्धि गुरु अमिताचार्य जी के मार्गदर्शन में। परामर्श हेतु संपर्क करें 🙏
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द्वितीय महाविद्या माँ तारा के 100 दिव्य नामों द्वारा स्तुति — वाणी, विद्या व रक्षा की कामना से पढ़ा जाता है।
नाम-स्मरण व स्तुति सभी श्रद्धालु कर सकते हैं; उग्र बीज-साधना गुरु-दीक्षा में।
॥ ॐ ह्रीं स्त्रीं हुं फट् ॥ — पूर्ण विधि तारा मंत्र पृष्ठ पर।
वाक्-सिद्धि, विद्या-बुद्धि, संकट-रक्षा, निर्भयता व आध्यात्मिक उन्नति।