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🔱 शक्ति साधना · स्तुति
तारा शतनाम स्तोत्र

तारा शतनाम स्तोत्र — महत्व, लाभ व पाठ विधि

आचार्य अमिताचार्य द्वारा · महाविद्या स्तुति · पढ़ने का समय ~5 मिनट

📖 इस लेख में
  1. शतनाम स्तोत्र क्या है?
  2. महत्व
  3. लाभ
  4. पाठ विधि
  5. सावधानी
  6. प्रश्न-उत्तर

तारा शतनाम स्तोत्र क्या है?

तारा शतनाम स्तोत्र में द्वितीय महाविद्या माँ तारा के एक सौ (शत) दिव्य नामों द्वारा स्तुति की जाती है। प्रत्येक नाम देवी के किसी विशेष गुण, रूप या कृपा-शक्ति का द्योतक है। तारा — जो भव-सागर से "तारने" वाली, नील-सरस्वती व उग्र-तारा रूपा हैं — की यह नामावली उनकी वाणी-सिद्धि, ज्ञान व संकट-रक्षा की महिमा गाती है।

🔱 शतनाम-पाठ देवी के नामों का श्रद्धामय स्मरण है; यह भक्ति व स्तुति का सरल, सुलभ मार्ग है। गूढ़ बीज-साधना गुरु-दीक्षा में की जाती है।

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महत्व

नामावली-पाठ का महत्व इसलिए है कि इसमें देवी का सम्पूर्ण स्वरूप नामों के माध्यम से स्मरण हो जाता है — साधक का मन एकाग्र होता है और श्रद्धा गहरी होती है। तारा की नामावली विशेष रूप से वाणी, विद्या, बुद्धि व निर्भयता की कामना से पढ़ी जाती है। महाविद्याओं में तारा को उग्र-सौम्य माना गया है — कठिन संकट में शीघ्र रक्षा करने वाली।

लाभ

पाठ विधि (सरल)

  1. प्रातः स्नान कर स्वच्छ आसन पर पूर्व/उत्तर मुख बैठें; माँ तारा के चित्र/यंत्र के सम्मुख दीप जलाएँ।
  2. संकल्प व प्रणाम कर मूल मंत्र की एक माला जप करें — ॥ ॐ ह्रीं स्त्रीं हुं फट् ॥
  3. तत्पश्चात् श्रद्धा-भाव से तारा शतनाम/नामावली का पाठ करें; प्रत्येक नाम का शुद्ध उच्चारण करें।
  4. अंत में क्षमा-प्रार्थना कर देवी को नमन करें।
🔱 मूल मंत्र: ॥ ॐ ह्रीं स्त्रीं हुं फट् ॥

पूर्ण मंत्र, गायत्री व साधना विधि (3 भाषा में): तारा मंत्र पृष्ठ · गूढ़ ज्ञान: दस महाविद्या — तारा

🔱 तारा जैसी उग्र महाविद्या-साधना पारम्परिक रूप से केवल गुरु-दीक्षा द्वारा ग्रहण की जाती है — श्रद्धा से नाम-स्मरण सभी कर सकते हैं।

सावधानी

नाम-स्मरण व स्तुति सभी श्रद्धालु कर सकते हैं। तारा की उग्र बीज-साधना, विशेष प्रयोग व अनुष्ठान केवल गुरु-दीक्षा व मार्गदर्शन में करें। श्मशान-साधना जैसे उग्र मार्ग सामान्य साधक हेतु नहीं हैं।

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तारा की विधिवत बीज-साधना, दीक्षा व मंत्र-सिद्धि गुरु अमिताचार्य जी के मार्गदर्शन में। परामर्श हेतु संपर्क करें 🙏

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प्रश्न-उत्तर (FAQ)

तारा शतनाम स्तोत्र क्या है?

द्वितीय महाविद्या माँ तारा के 100 दिव्य नामों द्वारा स्तुति — वाणी, विद्या व रक्षा की कामना से पढ़ा जाता है।

इसे कौन पढ़ सकता है?

नाम-स्मरण व स्तुति सभी श्रद्धालु कर सकते हैं; उग्र बीज-साधना गुरु-दीक्षा में।

मूल मंत्र क्या है?

॥ ॐ ह्रीं स्त्रीं हुं फट् ॥ — पूर्ण विधि तारा मंत्र पृष्ठ पर।

प्रमुख लाभ?

वाक्-सिद्धि, विद्या-बुद्धि, संकट-रक्षा, निर्भयता व आध्यात्मिक उन्नति।

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