अपनी जन्म-तिथि, समय व स्थान भरें — मंगल ग्रह की भाव-स्थिति अनुसार संकेतात्मक मंगल दोष जाँच पाएँ। यह एक indicative जाँच है; निश्चित पुष्टि व उपाय गुरु अमिताचार्य जी के विश्लेषण में।
मंगल दोष (मांगलिक योग) तब बनता है जब जन्म-कुंडली में मंगल ग्रह लग्न (Lagna) से 1, 2, 4, 7, 8 अथवा 12वें भाव में स्थित होता है। यह ज्योतिष में विवाह-मिलान के समय विशेष रूप से देखा जाने वाला एक प्रमुख दोष है। शास्त्रों में इसके कुछ पारंपरिक वैकल्पिक आधार भी हैं — कुछ ग्रंथ मंगल की स्थिति चंद्र राशि से गिनने की बात करते हैं, तो कुछ शुक्र राशि से। हमारा टूल तीनों आधार दिखाता है ताकि आप पूरी तस्वीर देख सकें।
ध्यान रहे — मंगल दोष की वास्तविक तीव्रता कई कारकों पर निर्भर करती है: मंगल किस राशि में है (नीचस्थ/उच्चस्थ/स्वराशि), उस पर किन ग्रहों की दृष्टि है, तथा वर-वधू दोनों की कुंडली में दोष है या नहीं। यह मुफ़्त टूल केवल एक प्रारंभिक, संकेतात्मक जाँच है — निश्चित निर्णय व उपाय के लिए गुरु अमिताचार्य जी से परामर्श आवश्यक है।
जब जन्म-कुंडली में मंगल ग्रह लग्न से 1, 2, 4, 7, 8 अथवा 12वें भाव में स्थित हो, तो इसे मंगल दोष (मांगलिक योग) कहा जाता है।
प्रभाव कई कारकों पर निर्भर करता है — मंगल की राशि, दृष्टि व दोनों कुंडलियों की स्थिति। सामान्य टूल केवल संकेत देता है; निश्चित निर्णय गुरु जी के विश्लेषण के बाद ही लें।
यह टूल आपकी जन्म-तिथि, समय व स्थान अनुसार ग्रह-गणना कर संकेतात्मक परिणाम देता है। सटीक जन्म-समय आवश्यक है। निश्चित पुष्टि व उपाय हेतु Ultimate Analysis लें।
सामान्य उपाय के रूप में मंगलवार को हनुमान जी की उपासना व दान बताया जाता है। सटीक व्यक्तिगत उपाय गुरु अमिताचार्य जी परामर्श में बताते हैं — ये गुरुजी consultation में बताएँगे।