केतु ग्रह की शांति हेतु प्रामाणिक मंत्र — केतु दोष, काल सर्प दोष, केतु महादशा/अंतर्दशा, अकारण रोग, वैराग्य-अस्थिरता व आध्यात्मिक बाधाओं के निवारण हेतु।
ग्रहकेतु (छाया-ग्रह)
बीजस्रां स्रीं स्रौं
जप संख्या108 नित्य · 17000 अनुष्ठान
मालारुद्राक्ष (9-मुखी)/लहसुनिया
दिनमंगलवार/बुधवार
दिशानैऋत्य
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केतु एक छाया-ग्रह है — चंद्र की दक्षिण पात (south node), राहु का पूरक। यह वैराग्य, मोक्ष, रहस्य-विद्या, अचानक घटनाओं व पूर्व-कर्मों का कारक है। अशुभ केतु अकारण रोग, भ्रम, अस्थिरता व आध्यात्मिक बेचैनी दे सकता है; शुभ होने पर गहन आध्यात्मिक उन्नति व सिद्धि देता है।
यह मंत्र केतु की ऊर्जा को संतुलित कर, रोग-निवृत्ति, स्थिरता व आत्म-ज्ञान देता है। काल सर्प दोष में राहु-केतु दोनों की शांति करें — देखें: काल सर्प दोष क्या है।
🌿 लाभ
केतु दोष व काल सर्प दोष में शांति
केतु महादशा/अंतर्दशा की पीड़ा-शमन
अकारण/जटिल रोगों में राहत
मानसिक अस्थिरता व भ्रम दूर
आध्यात्मिक उन्नति, ध्यान व मोक्ष-मार्ग में सहायक
शत्रु-बाधा व नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा
🪔 सम्पूर्ण साधना विधि
सामग्री
तिल-तेल का दीप, धूम्र/मिश्रित रंग के पुष्प, केतु यंत्र/चित्र, नारियल, कुल्थी (horse-gram) या तिल, शुद्ध जल, आसन व रुद्राक्ष (9-मुखी) या लहसुनिया माला।
स्नान व शुद्धि
स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें; नैऋत्य दिशा की ओर मुख करके आसन पर बैठें, मन शांत करें।
दीप व प्रणाम
केतु यंत्र/चित्र के सम्मुख तिल-तेल का दीप जलाएँ, पुष्प व जल अर्पित कर प्रणाम करें।
संकल्प
दाहिने हाथ में जल लेकर नाम, गोत्र, स्थान व उद्देश्य (केतु-दोष/काल सर्प शांति) कहकर संकल्प लें।
माला जप
रुद्राक्ष/लहसुनिया माला से मंत्र का शुद्ध उच्चारण करते हुए एक माला (108 बार) जप करें। सुमेरु को न लाँघें।
ध्यान
जप के साथ केतु की ऊर्जा संतुलित होकर मन में स्थिरता व आत्म-प्रकाश भरते हुए अनुभव करें।
समर्पण
जप पूर्ण होने पर समस्त जप केतु देव को समर्पित करें; कुल्थी/तिल व नारियल दान करें।
⏰ श्रेष्ठ समय व नियम
समय: संध्या।
विशेष दिन: मंगलवार अथवा बुधवार।
नियमितता: 40 दिन नियमित जप से विशेष लाभ।
दान: कुल्थी, तिल, कम्बल, नारियल व सप्तधान्य का दान शुभ।
आचार: सात्विक आहार, सत्य व संयम।
⚠️ सावधानी:⚠️ सावधानी: लहसुनिया (Cat's Eye) रत्न केवल योग्य ज्योतिषी से कुंडली दिखाकर ही धारण करें। काल सर्प दोष व केतु महादशा की विशेष शांति गुरु-मार्गदर्शन में करें। सामान्य भक्त नित्य 108 जप श्रद्धा से कर सकते हैं।
जप की पूर्ण सिद्धि हेतु गुरु अमिताचार्य जी द्वारा प्राण-प्रतिष्ठित यंत्र व माला — घर तक सुरक्षित डिलीवरी। किसी भी साधना/अनुष्ठान से पहले महाकाली तंत्र पीठ से परामर्श अवश्य लें।