होममंत्र संग्रह › लक्ष्मी गायत्री मंत्र
🌺 लक्ष्मी · गायत्री

॥ लक्ष्मी गायत्री मंत्र ॥

देवी महालक्ष्मी के ध्यान हेतु गायत्री-मंत्र — समृद्धि, सौभाग्य व श्री-प्राप्ति का साधन।

देवतामाँ महालक्ष्मी
प्रकारगायत्री मंत्र
जप संख्या108 नित्य
मालाकमलगट्टा/स्फटिक
श्रेष्ठ समयशुक्रवार
दिनदीपावली विशेष
👆 अपनी सुविधा अनुसार भाषा चुनें — पूरा पेज उसी भाषा में पढ़ें (मंत्र, अर्थ, विधि सब) 🙏
ॐ महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णुपत्न्यै च धीमहि।
तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात्॥

📖 शब्दार्थ (Word-by-Word)

महालक्ष्म्यै च विद्महेहम महालक्ष्मी को जानते हैं
विष्णुपत्न्यै च धीमहिविष्णुप्रिया का ध्यान करते हैं
तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात्वे लक्ष्मी हमें प्रेरित करें

🕉️ विस्तृत व्याख्या

यह गायत्री-छंद में देवी लक्ष्मी की स्तुति है, जिसमें उन्हें विष्णुपत्नी कहकर उनका ध्यान किया जाता है और समृद्धि व सौभाग्य की प्रेरणा माँगी जाती है।

यह मंत्र भौतिक व आध्यात्मिक दोनों प्रकार की श्री (शोभा) प्रदान करता है। शुक्रवार व दीपावली को विशेष जपा जाता है।

🌿 लाभ

समृद्धि व सौभाग्य
श्री व ऐश्वर्य
गृह-शांति
मानसिक संतोष

🪔 सम्पूर्ण साधना विधि

सामग्री व तैयारी

घी या कपूर का दीप, शुद्ध जल, पुष्प, लक्ष्मी चित्र/यंत्र, कमल पुष्प, दीप, स्वच्छ आसन तथा कमलगट्टा या स्फटिक माला तैयार रखें।

स्नान व शुद्धि

प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख करके आसन पर बैठें। मन को शांत करें।

दीप व प्रणाम

माँ महालक्ष्मी के चित्र/यंत्र के सम्मुख दीप जलाएँ, पुष्प व जल अर्पित कर श्रद्धा से प्रणाम करें।

संकल्प

दाहिने हाथ में जल लेकर अपना नाम, गोत्र, स्थान व उद्देश्य (समृद्धि व सौभाग्य) कहकर संकल्प लें।

माला जप

कमलगट्टा या स्फटिक माला से मंत्र का शुद्ध, स्पष्ट उच्चारण करते हुए कम-से-कम एक माला (108 बार) जप करें। सुमेरु (मेरु मणि) को न लाँघें — वहाँ से माला पलटकर पुनः जपें।

ध्यान

जप के साथ माँ महालक्ष्मी के दिव्य स्वरूप व कृपा-प्रकाश का ध्यान करें और भाव रखें कि उनकी कृपा आप पर बरस रही है।

समर्पण

जप पूर्ण होने पर हाथ जोड़कर समस्त जप माँ महालक्ष्मी को समर्पित करें और प्रसाद ग्रहण करें।

⏰ श्रेष्ठ समय व नियम

🔱 इस मंत्र व साधना को सुव्यवस्थित, गुरु-निर्देशित रूप में आगे बढ़ाने हेतु महालक्ष्मी धन-समृद्धि साधना उपलब्ध है — घर बैठे सम्पूर्ण विधि व मार्गदर्शन सहित।

❓ प्रश्न-उत्तर

लक्ष्मी गायत्री का अर्थ क्या है?हम विष्णुप्रिया महालक्ष्मी का ध्यान करते हैं; लक्ष्मी हमें प्रेरित करें।
लक्ष्मी गायत्री कितनी बार जपना चाहिए?नित्य 108 बार।
क्या इसे जपने के लिए दीक्षा आवश्यक है?नित्य 108 जप श्रद्धा से कोई भी कर सकता है, दीक्षा अनिवार्य नहीं। विशेष अनुष्ठान, सम्पुट व हवन के लिए गुरु मार्गदर्शन उचित है।
लक्ष्मी गायत्री जपने का सर्वोत्तम समय कौन-सा है?शुक्रवार व दीपावली श्रेष्ठ।

🔱 विधिवत अनुष्ठान / व्यक्तिगत मार्गदर्शन

अपनी कुंडली अनुसार सही मंत्र, यंत्र व उपाय जानने हेतु आचार्य जी से मार्गदर्शन लें।

प्रश्न पूछें (₹151) मंत्र संग्रह कुंडली विश्लेषण

📿 इस मंत्र हेतु अभिमंत्रित यंत्र व माला

जप की पूर्ण सिद्धि हेतु गुरु अमिताचार्य जी द्वारा प्राण-प्रतिष्ठित यंत्र व माला — घर तक सुरक्षित डिलीवरी। किसी भी साधना/अनुष्ठान से पहले महाकाली तंत्र पीठ से परामर्श अवश्य लें।

🔱 सिद्ध यंत्र व माला — Store🪔 विधिवत पूजा/अनुष्ठान बुक करें
online·👁