यह प्रसिद्ध श्लोक ब्रह्मा, विष्णु (मुरारि), शिव (त्रिपुरान्तक) तथा नौ ग्रहों — सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु व केतु — का आवाहन कर सबसे शांति व अनुकूलता की प्रार्थना करता है।
जिनकी कुंडली में कोई ग्रह-दोष हो, उनके लिए यह मंत्र समग्र ग्रह-शांति व जीवन-संतुलन हेतु प्रतिदिन प्रातः जपने योग्य है।
🌿 लाभ
समग्र ग्रह-दोष शांति
जीवन में संतुलन
बाधा-निवारण
मानसिक शांति
सर्व-अनुकूलता
🪔 सम्पूर्ण साधना विधि
सामग्री व तैयारी
घी या कपूर का दीप, शुद्ध जल, पुष्प, नवग्रह यंत्र/चित्र, दीप, जल-अर्घ्य, स्वच्छ आसन तथा स्फटिक या रुद्राक्ष माला तैयार रखें।
स्नान व शुद्धि
प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख करके आसन पर बैठें। मन को शांत करें।
दीप व प्रणाम
नवग्रह के चित्र/यंत्र के सम्मुख दीप जलाएँ, पुष्प व जल अर्पित कर श्रद्धा से प्रणाम करें।
संकल्प
दाहिने हाथ में जल लेकर अपना नाम, गोत्र, स्थान व उद्देश्य (ग्रह-शांति व संतुलन) कहकर संकल्प लें।
माला जप
स्फटिक या रुद्राक्ष माला से मंत्र का शुद्ध, स्पष्ट उच्चारण करते हुए कम-से-कम एक माला (108 बार) जप करें। सुमेरु (मेरु मणि) को न लाँघें — वहाँ से माला पलटकर पुनः जपें।
ध्यान
जप के साथ नवग्रह के दिव्य स्वरूप व कृपा-प्रकाश का ध्यान करें और भाव रखें कि उनकी कृपा आप पर बरस रही है।
समर्पण
जप पूर्ण होने पर हाथ जोड़कर समस्त जप नवग्रह को समर्पित करें और प्रसाद ग्रहण करें।
⏰ श्रेष्ठ समय व नियम
समय: प्रातः
विशेष दिन: प्रतिदिन (सोम/शनि विशेष)
नियमितता: प्रतिदिन एक ही समय, स्थान व आसन पर जप करें — इससे सिद्धि शीघ्र होती है।
आचार: जप-काल में सात्विक आहार, सत्य व संयम का पालन करें।
📜 स्रोत व कथा
यह नवग्रह-स्तुति श्लोक पारंपरिक ग्रह-शांति पूजन व नित्य संध्या में प्रयुक्त होता है।
नवग्रह शांति मंत्र का अर्थ क्या है?ब्रह्मा-विष्णु-शिव व नौ ग्रहों से शांति व अनुकूलता की प्रार्थना।
नवग्रह शांति मंत्र कितनी बार जपना चाहिए?प्रातः 3, 7 या 11 बार।
क्या इसे जपने के लिए दीक्षा आवश्यक है?नित्य 108 जप श्रद्धा से कोई भी कर सकता है, दीक्षा अनिवार्य नहीं। विशेष अनुष्ठान, सम्पुट व हवन के लिए गुरु मार्गदर्शन उचित है।
नवग्रह शांति मंत्र जपने का सर्वोत्तम समय कौन-सा है?प्रातः प्रतिदिन श्रेष्ठ।
🔱 विधिवत अनुष्ठान / व्यक्तिगत मार्गदर्शन
अपनी कुंडली अनुसार सही मंत्र, यंत्र व उपाय जानने हेतु आचार्य जी से मार्गदर्शन लें।
जप की पूर्ण सिद्धि हेतु गुरु अमिताचार्य जी द्वारा प्राण-प्रतिष्ठित यंत्र व माला — घर तक सुरक्षित डिलीवरी। किसी भी साधना/अनुष्ठान से पहले महाकाली तंत्र पीठ से परामर्श अवश्य लें।