धर्म-स्वरूप राम का त्रयोदशाक्षरी (तेरह अक्षर) विजय-मंत्र — मन-शांति, रक्षा व धर्म-बल हेतु।
देवताभगवान श्री राम
प्रकारत्रयोदशाक्षरी मूल मंत्र
जप संख्या108 · निरंतर
मालातुलसी
श्रेष्ठ समयप्रातः/संध्या
दिनरामनवमी · मंगलवार
👆 अपनी सुविधा अनुसार भाषा चुनें — पूरा पेज उसी भाषा में पढ़ें (मंत्र, अर्थ, विधि सब) 🙏
॥ श्री राम जय राम जय जय राम ॥
📖 शब्दार्थ (Word-by-Word)
श्री राम
श्री सहित भगवान राम
जय राम
राम की जय हो
जय जय राम
बारंबार राम की विजय
🕉️ विस्तृत व्याख्या
यह तेरह अक्षरों वाला (त्रयोदशाक्षरी) राम-मंत्र संत समर्थ रामदास व अन्य संतों द्वारा अत्यंत प्रचारित हुआ। 'राम' नाम स्वयं तारक-मंत्र माना गया है — जो भव-सागर से पार उतारता है।
इसका निरंतर जप मन को शांत, निर्भय व धर्म-बल से पूर्ण करता है। इसे माला पर या 'राम-धुन' के रूप में गाया जा सकता है।
🌿 लाभ
मन-शांति व स्थिरता
भय व संकट से रक्षा
धर्म-बल व सद्बुद्धि
भक्ति व मोक्ष-मार्ग
🪔 सम्पूर्ण साधना विधि
सामग्री व तैयारी
घी या कपूर का दीप, शुद्ध जल, पुष्प, राम/राम-दरबार चित्र, तुलसी दल, दीप, स्वच्छ आसन तथा तुलसी माला तैयार रखें।
स्नान व शुद्धि
प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख करके आसन पर बैठें। मन को शांत करें।
दीप व प्रणाम
भगवान श्री राम के चित्र/यंत्र के सम्मुख दीप जलाएँ, पुष्प व जल अर्पित कर श्रद्धा से प्रणाम करें।
संकल्प
दाहिने हाथ में जल लेकर अपना नाम, गोत्र, स्थान व उद्देश्य (शांति, रक्षा व भक्ति) कहकर संकल्प लें।
माला जप
तुलसी माला से मंत्र का शुद्ध, स्पष्ट उच्चारण करते हुए कम-से-कम एक माला (108 बार) जप करें। सुमेरु (मेरु मणि) को न लाँघें — वहाँ से माला पलटकर पुनः जपें।
ध्यान
जप के साथ भगवान श्री राम के दिव्य स्वरूप व कृपा-प्रकाश का ध्यान करें और भाव रखें कि उनकी कृपा आप पर बरस रही है।
समर्पण
जप पूर्ण होने पर हाथ जोड़कर समस्त जप भगवान श्री राम को समर्पित करें और प्रसाद ग्रहण करें।
⏰ श्रेष्ठ समय व नियम
समय: प्रातः व संध्या
विशेष दिन: रामनवमी व मंगलवार
नियमितता: प्रतिदिन एक ही समय, स्थान व आसन पर जप करें — इससे सिद्धि शीघ्र होती है।
आचार: जप-काल में सात्विक आहार, सत्य व संयम का पालन करें।
जप की पूर्ण सिद्धि हेतु गुरु अमिताचार्य जी द्वारा प्राण-प्रतिष्ठित यंत्र व माला — घर तक सुरक्षित डिलीवरी। किसी भी साधना/अनुष्ठान से पहले महाकाली तंत्र पीठ से परामर्श अवश्य लें।