तीनों लोकों की सुंदरी, श्रीविद्या की अधिष्ठात्री तृतीय महाविद्या त्रिपुर सुंदरी (ललिता · राजराजेश्वरी) का मंत्र — सौंदर्य, ऐश्वर्य, दांपत्य-सुख व आनंद हेतु।
देवीत्रिपुर सुंदरी (षोडशी · ललिता)
महाविद्यातृतीय · श्रीविद्या
बीजऐं · ह्रीं · श्रीं
जप108 नित्य
मालाकमलगट्टा/स्फटिक
दिन · दिशाशुक्र · ईशान
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त्रिपुर सुंदरी तृतीय महाविद्या हैं — श्रीविद्या की अधिष्ठात्री, श्रीयंत्र की स्वामिनी, जो समस्त ब्रह्मांड का ज्यामितीय स्वरूप है। ललिता, राजराजेश्वरी — सौंदर्य, आनंद व ऐश्वर्य की परा-शक्ति। इनकी उपासना शाक्त-साधना का शिखर मानी जाती है।
शुद्ध जल, लाल-गुलाबी पुष्प, त्रिपुर सुंदरी यंत्र/चित्र, घी/तिल-तेल का दीप, आसन व कमलगट्टा/स्फटिक माला।
स्नान व शुद्धि
प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें; ईशान/पूर्व दिशा की ओर मुख करके आसन पर बैठें।
दीप व प्रणाम
त्रिपुर सुंदरी यंत्र/चित्र के सम्मुख दीप जलाएँ, पुष्प व जल अर्पित कर प्रणाम करें।
संकल्प
दाहिने हाथ में जल लेकर नाम, गोत्र, स्थान व उद्देश्य (सौंदर्य/ऐश्वर्य-सिद्धि · दांपत्य-सुख) कहकर संकल्प लें।
माला जप
माला से मंत्र का शुद्ध, स्पष्ट उच्चारण करते हुए कम-से-कम एक माला (108) जप करें। सुमेरु न लाँघें।
ध्यान
जप के साथ माता के दिव्य स्वरूप व कृपा-प्रकाश का ध्यान करें।
समर्पण
जप पूर्ण होने पर समस्त जप माता को समर्पित करें व प्रसाद ग्रहण करें।
⏰ श्रेष्ठ समय व नियम
समय: प्रातः/संध्या।
विशेष दिन: शुक्रवार।
श्रीयंत्र: श्रीयंत्र-पूजन व ललिता सहस्रनाम पाठ अत्यंत शुभ।
नियमितता: 40 दिन नियमित जप से विशेष लाभ।
आचार: सात्विक, स्वच्छ व श्रद्धामय।
⚠️ सावधानी:⚠️ सावधानी: श्रीविद्या के पंचदशी/षोडशी मंत्र केवल गुरु-परंपरा से दीक्षा लेकर ही ग्रहण करें। यह "ॐ ऐं ह्रीं श्रीं त्रिपुरसुंदर्यै नमः" नाम-मंत्र व ललिता सहस्रनाम पाठ सभी श्रद्धालु कर सकते हैं।
🔱 त्रिपुर सुंदरी जैसी उग्र महाविद्या-साधना पारम्परिक रूप से केवल गुरु-दीक्षा द्वारा ही ग्रहण की जाती है — बिना दीक्षा तीव्र प्रयोग न करें।
❓ प्रश्न-उत्तर
त्रिपुर सुंदरी मंत्र का अर्थ?वाग्भव (ऐं), माया (ह्रीं) व लक्ष्मी (श्रीं) बीजों सहित त्रिपुर सुंदरी को नमन — जो सौंदर्य, ज्ञान व ऐश्वर्य देती हैं।
कितनी बार जपें?नित्य 108 बार; श्रीविद्या-उपासना गुरु-दीक्षा में।
क्या दीक्षा आवश्यक है?नाम-मंत्र व ललिता सहस्रनाम श्रद्धा से कोई भी कर सकता है; पंचदशी/षोडशी हेतु गुरु-दीक्षा अनिवार्य।
सर्वोत्तम दिन?शुक्रवार; श्रीयंत्र-पूजन सहित।
🔱 विधिवत अनुष्ठान / व्यक्तिगत मार्गदर्शन
अपनी कुंडली अनुसार सही मंत्र, यंत्र व उपाय जानने हेतु आचार्य जी से मार्गदर्शन लें।
जप की पूर्ण सिद्धि हेतु गुरु अमिताचार्य जी द्वारा प्राण-प्रतिष्ठित यंत्र व माला — घर तक सुरक्षित डिलीवरी। किसी भी साधना/अनुष्ठान से पहले महाकाली तंत्र पीठ से परामर्श अवश्य लें।