अपनी जन्म-तिथि, समय व स्थान भरें — सभी 7 ग्रहों की राहु-केतु धुरी अनुसार संकेतात्मक काल सर्प दोष जाँच पाएँ, व जानें 12 प्रकारों में से कौन-सा बनता है। यह एक indicative जाँच है; निश्चित पुष्टि व उपाय गुरु अमिताचार्य जी के विश्लेषण में।
काल सर्प दोष (योग) तब बनता है जब जन्म-कुंडली के सभी सातों ग्रह (सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि) राहु व केतु की धुरी के एक ही ओर स्थित हों — अर्थात कोई भी ग्रह इस धुरी को पार नहीं करता। राहु जिस भाव में स्थित होता है, उसके अनुसार शास्त्रों में इसके 12 प्रकार बताए गए हैं।
ध्यान रहे — काल सर्प दोष का वास्तविक प्रभाव कई कारकों पर निर्भर करता है: क्या दोष पूर्ण है या आंशिक (कोई एक ग्रह निकट है), राहु-केतु व अन्य ग्रहों की दशा, तथा उन पर गुरु/शुभ ग्रहों की दृष्टि। यह मुफ़्त टूल केवल एक प्रारंभिक, संकेतात्मक जाँच है — निश्चित निर्णय, तीव्रता व शांति-उपाय के लिए गुरु अमिताचार्य जी से परामर्श आवश्यक है।
जब जन्म-कुंडली के सभी सातों ग्रह राहु व केतु की धुरी के एक ही तरफ स्थित हों, तो काल सर्प दोष (योग) बनता है।
राहु जिस भाव में स्थित होता है उसके अनुसार 12 प्रकार माने गए हैं — अनंत, कुलिक, वासुकि, शंखपाल, पद्म, महापद्म, तक्षक, कर्कोटक, शंखचूड़, घातक, विषधर व शेषनाग।
नहीं — यह एक सामान्यीकरण है। दोष की वास्तविक तीव्रता ग्रहों की दृष्टि, राशि व दशा पर निर्भर करती है। निश्चित प्रभाव व उपाय गुरु जी के विश्लेषण में ही स्पष्ट होते हैं।
यह टूल आपकी जन्म-तिथि, समय व स्थान अनुसार ग्रह-गणना कर संकेतात्मक परिणाम देता है। सटीक जन्म-समय आवश्यक है। निश्चित पुष्टि व उपाय हेतु Ultimate Analysis लें।